स्वच्छता अभियान के लिए किए करोड़ो खर्च, फिर भी एक अवार्ड के लिए तरसा हमारा रायपुर

स्वच्छता अभियान के लिए किए करोड़ो खर्च, फिर भी एक अवार्ड के लिए तरसा हमारा रायपुर

Deepak Sahu | Publish: May, 18 2018 10:58:27 AM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

स्वच्छता अभियान 2018 के विभिन्न केटेगरी के लिए अवार्ड की सूची में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के हिस्से के एक भी अवार्ड नहीं आ रहा

रायपुर . राजधानी में स्वच्छता अभियान के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने पैसे की कमी नहीं होने दी, इसके बावजूद एक भी अवार्ड नहीं अवार्ड नहीं मिल रहा है।शहरी आवास मंत्रालय द्वारा स्वच्छता अभियान 2018 के विभिन्न केटेगरी के लिए अवार्ड की सूची में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के हिस्से के एक भी अवार्ड नहीं आना नगर निगम के स्वच्छता अभियान का काम देख रहे अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।

नहीं मिल रहा अवार्ड
स्वच्छता अभियान के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने पैसे की कमी नहीं होने दी, इसके बावजूद अपनी राजधनी को एक भी अवार्ड नहीं मिलना यानी नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की नाकामी है। निगम मुख्यालय से लेकर राजधानी के विभिन्न विभागों और चौक-चौराहों पर इसी बात को लेकर चर्चा होती रही कि आखिर क्यों हमारी राजधानी स्वच्छता के मामले में अवार्ड केटेगरी और रैंकिंग मेंं पीछे रह जाती है। पिछली बार रायपुर की रैंकिंग 129 थीं।

इन वजहों से पिछड़ा शहर
जनप्रतिनिधियों को साथ नहीं लेना पड़ा भारी : स्वच्छता अभियान के सर्वे के लिए छोटी-छोटी बातों को नगर निगम के अधिकरियों ने नजरअंदाज किया। इसी वजह से बड़े काम अभी तक पूरे नहीं हो पाए। मसलन, शहर में अंडर ग्राउंड डैनेज सिस्टम का प्लान रद्द करना, संकरी में कचरा निष्पादन का प्लांट नहीं लगाना, सर्वे के पहले डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन कंपनी द्वारा शुरू नहीं कराना आदि वजहों से रायपुर रैंकिंग में पिछड़ गया। निगम अधिकारियों ने स्वच्छता अभियान के दौरान वार्डों के पार्षदों को पूरे समय अपने साथ जोडक़र नहीं रखे। इस कारण से कुछ पार्षदों ने अपने वार्डों में लोगों से फीडबैक और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का यूजर चार्ज वसूलने से मना कर दिया था।

घटिया क्वालिटी के डस्टबिन बांटे गए
अफसरों ने प्रचार-प्रसार, होर्डिंग, बैनर, गीत-संगीत, नुक्कड़ नाटक, जागरुकता अभियान चलाने सहित अन्य कार्यों में ही एक से चार करोड़ रुपए फूंक दिए। इसके अलावा सूडा ने भी स्वच्छता अभियान में अपने स्तर पर प्रचार-प्रसार सामग्री, स्वच्छता एप आदि अलग से बनवाया था। लोगों को सूखा और गीला-कचरा अलग-अलग रखने के लिए लोगों को घटिया क्वालिटी के डस्टबिन भी बांटे गए। कुछ जोनों के कार्यालयांे में तो अभी भी डस्टबिन बेतरतीब तरीके से पड़े हुए हैं।

केंद्रीय टीम ने लोगों से क्या सवाल पूछे
क्या आपको यह जानकारी है कि आपका शहर स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में हिस्सा ले
रहा है।
आपका क्षेत्र क्या पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा साफ है।
क्या इस साल आपने व्यावसायिक क्षेत्रों में लगे छोटे डस्टबिन का उपयोग शुरू किया है।
क्या आप इस साल पृथकीकृत (गीला सूखा) घर-घर कचरा संग्रहण से संतुष्ट हैं ।
क्या पिछले साल की अपेक्षा मूत्रालय-शौचालय की व्यवस्था बढ़ी है,
जिसके कारण लोगों ने खुले में
पेशाब और शौच करना बंद किया है।
क्या सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालय पहले की अपेक्षा
ज्यादा साफ हैं और उन तक
पहुंचना आसान है।
इस साल सर्वे के
ये थे मुख्य बिंदु
कॉलोनियों, बस्तियों, पुराना शहर, अव्यवस्थित और व्यवस्थित बसा क्षेत्र साफ है या नहीं।
महिला और पुलिस पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट। क्या इन्हें बच्चे भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
टॉयलेट की सफाई के साथ रोशनदान, जलप्रदाय और लाइट के इंतजाम।
टॉयलेट एरिया में ड्रेनेज सिस्टम।
टॉयलेट में स्वच्छ भारत मिशन के संदेश वाले होर्डिंग, बैनर, वॉल पेंटिंग।
मार्केट में सफाई व्यवस्था।
सब्जी, फल, मीट या फि श मार्केट में साइट कंपोस्टिंग, वेस्ट ट्रांसफ र स्टेशन और प्राइमरी वेस्ट कलेक्शन सेंटर की जानकारी।
सफाई को लेकर लगे साइन बोर्ड।
रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर
सफाई व्यवस्था।
मुख्य स्टेशन पर रेलवे ट्रैक या प्लेटफ ॉर्म के आसपास 500 मीटर क्षेत्र में कहीं खुले में शौच तो नहीं की जा रही।
शहर में लगे डस्टबीन के बारे में जानकारी और उसके इस्तेमाल को
लेकर जागरुकता।


रायपुर , नगर निगम आयुक्त, रजत बंसल ने बताया स्वच्छता सर्वे के अवार्ड केटेगरी में अवार्ड किस कारण से नहीं मिलने है, इसकी समीक्षा की जा रही है। लेकिन हमें अभी भी उम्मीद है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार रैंकिंग में जरूर सुधार आएगी। फिलहाल सूची का इंतजार है। तीन-चार दिन में क्लियर हो जाएगा।

Ad Block is Banned