सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट का गृह जिले में ही बुरा हाल, 10 लाख खर्च, मॉडल गोठान पूरा होने से पहले कंडम

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ड्रीम प्रोजेक्ट गौठान निर्माण का उनके ही जिले में बुरा हाल है। नगर निगम के अफसरों ने पहले टेंडर खुलने का इंतजार किए बिना गोकुल नगर में चहेते ठेकेदार को 10.14 लाख रुपए से गौठान निर्माण का काम दे दिया। मामला खुला तो निर्माण आधा-अधूरा छोड़ दिया और अब फंड का रोड़ा बताकर गेट पर ताला जड़ दिया है। इधर 4 हजार से ज्यादा मवेशी शहर की सडक़ों पर घूम रहे हैं।

रायपुर/दुर्ग. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ड्रीम प्रोजेक्ट गौठान निर्माण का उनके ही जिले में बुरा हाल है। नगर निगम के अफसरों ने पहले टेंडर खुलने का इंतजार किए बिना गोकुल नगर में चहेते ठेकेदार को 10.14 लाख रुपए से गौठान निर्माण का काम दे दिया। मामला खुला तो निर्माण आधा-अधूरा छोड़ दिया और अब फंड का रोड़ा बताकर गेट पर ताला जड़ दिया है। इधर 4 हजार से ज्यादा मवेशी शहर की सडक़ों पर घूम रहे हैं।
सरकार के नरवा, गरवा, घुरवा, बारी प्रोजेक्ट के तहत शहर में आवारा मवेशियों को रखने के लिए पुलगांव, बघेरा, उरला और बोरसी में 4 गौठान बनाने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए 96 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई है। पहले चरण में पुलगांव में गोकुल नगर के पास साढ़े 5 एकड़ में गौठान निर्माण शुरू किया गया था। जुलाई में तामझाम के साथ काम शुरू कराया गया। पशुओं के लिए शेड, फिलिंग व फेंसिंग बनाया गया। इसके बाद से काम बंद है और गेट पर ताला लटका है।
जमीन नहीं खोज पाए
गोकुल नगर के अलावा शहर के बघेरा, उरला व बोरसी में भी मॉडल गौठान बनाने की मंजूरी मिली है। यहां सभी आवारा मवेशियों को ठिकाना मिल जाता, लेकिन निगम के अफसर इनके लिए जगह तक नहीं खोज पाए हैंं।

इंतजाम नहीं कर पाए
गौठान 1 अगस्त को हरेली के दिन शुरू होना था। इससे पहले मवेशियों के चारा के लिए 4 एकड़ भूमि में नेपियर घास और मक्का उगाना था। लेकिन चारा तो दूर 3 माह में निगम के अफसर मवेशियों के लिए पानी का भी प्रबंध नहीं कर पाए।
गोठान से यह होता फायदा
- आवारा मवेशी सडक़ों पर भटकते हैं, इससे दुर्घटना का खतरा होता है। गौठान में मवेशियों को रखने से समस्या खत्म हो जाती।
- पूर्व में अस्थायी कांजी हाउस में आवारा मवेशियों को पकडकऱ बंद किया जाता था। पर्याप्त जमीन नहीं होने के कारण कांजी हाउस बंद हो गया है। गौठान के बाद कांजी हाउस की जरूरत नहीं रहेगी।
- सब्जी व फल बाजार में आवारा मवेशियों का आतंक रहता है। मवेशी फल व सब्जियां चट कर जाते हैं। इससे भी लोगों को राहत मिलेगी।
- मवेशियों से कारण सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी की भी शिकायत रहती है। गौठान बनने के बाद ह समस्या भी खत्म हो जाएगी।

चहेते ठेकेदार के लिए टेंडर में गड़बड़ी

गोठान निर्माण के टेंडर में भी गड़बड़ी का खुलासा हो चुका है। निगम प्रशासन ने शेड, फिलिंग और लिंक फेंसिंग के काम के लिए 24 जुलाई को 10.14 लाख का टेंडर बुलाया था। टेंडर की अंतिम तिथि 8 अगस्त रखी गई थी, लेकिन टेंडर खुलने से पहले ही पिछले दरवाजे से काम शुरू कर दिया गया था।
सडक़ों पर 4000 से ज्यादा मवेशी भटक रहे
निगम के अफसरों के मुताबिक शहर में 4 हजार से ज्यादा आवारा मवेशी हंै। इनमें से अधिकतर 24 घंटे सडक़ों पर घूमते रहते हैं। जीई रोड के अलावा इंदिरा मार्केट, पटरीपार सिकोला सब्जी मार्केट व धमधा रोड, पुलगांव के आसपास मवेशियों का जमावड़ा रहता है।

  • कामों में लेटलतीफी निगम प्रशासन की आदत में शामिल हो गई है। गौठान की तरह निगम में सैकड़ों जनहित के काम अधूरे पड़े हैं। निगम प्रशासन के कारण यहां सरकार की महती योजना दम तोड़ रही है।अफसरों को निर्माण पूर्ण कर गौठान प्रारंभ कराने कहा गया है।
    - अरुण वोरा, विधायक
  • गोठान का काम अभी पूरा नहीं हो पाया है। फंड को लेकर दिक्कत है। इस संबंध में प्रपोजल बनाकर भेजा गया है। प्रपोजल की क्या स्थिति है, फंड कब मिलेगा और गौठान का निर्माण कब तक हो पाएगा, यह अभी बता पाना अभी संभव नहीं है।
    - जितेंद्र समैया, प्रभारी अधिकारी
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