मानसून ब्रेक: 17 जिलों में बारिश कम, एक हफ्ते से नौतपा जैसी गर्मी, मिट्टी से 26 फीसदी नमी गायब

Monsoon break in Chhattisgarh 2021: जुलाई में नौतपा जैसी गर्मी और मानसून की बेरूखी ने आम लोगों के साथ ही किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 17 जिलों में 1 जून से 17 जुलाई के बीच उम्मीदों से कम बारिश हुई हैं।

By: Ashish Gupta

Published: 18 Jul 2021, 10:26 AM IST

रायपुर. Monsoon break in Chhattisgarh 2021: जुलाई में नौतपा जैसी गर्मी और मानसून (Monsoon News) की बेरूखी ने आम लोगों के साथ ही किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 17 जिलों (17 Ditrict in CG deficit rainfall) में 1 जून से 17 जुलाई के बीच उम्मीदों से कम बारिश हुई हैं। राजधानी सहित अन्य जिलों में भी यही हालात है। बीते सप्ताह से बारिश ना होने के कारण खरीफ फसल बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

हाल ही में कृषि विभाग के सर्वे में खुलासा हुआ है कि धीरे-धीरे जमीन से 26 फीसदी नमी गायब हो गई है, जिससे जमीन की ऊपरी परत पर दरारें आ रही हैं और उग चुकी फसलों का विकास भी 8 फीसदी कम हुआ है। कई जगह पौधे मुरझाने लगे हैं। कम बारिश के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने रायपुर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर सर्वे शुरू कर दिया है।

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अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे जिन किसानों ने धान की फसल की बुवाई की है वे अभी सबसे ज्यादा चिंतित हैं। खेतों से नमी गायब होने के कारण धान की फसल पीली हो रही है। बता दें कि अभी खेतों में धान की फसलों को रोपने का काम शुरू भी नहीं हो पाया है। मौसम विभाग का आंकलन है कि 18 जुलाई या इसके दो-तीन दिन के भीतर बारिश होने की संभावना है। इससे पहले जिले में 9 जुलाई को तेज बारिश हुई थी, जिसके बाद अधिकांश किसानों ने खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई कर दी।

जिले में 85 फीसदी बुआई पूरी
32 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच होने से अंकुरण प्रभावित हुआ और जहां अंकुरण हो गया है वहां पर पौधे मुरझाने लगे हैं। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र में जिले में 164514 हेक्टेयर रकबे में खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लगभग 85 प्रतिशत फसलों की बुवाई किसानों द्वारा की जा चुकी है।

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पहले बुवाई कर दी, अब चिंता
आरंग के किसान गजानंद जांगड़े ने बताया कि अच्छे मानसून की जानकारी मिल रही थी और समय से पहले भरपूर बारिश भी हो गई थी। इस वजह से खेत में धान, मक्का और अरहर की फसलों की बुवाई कर दी। अब 7 दिन बीत जाने के बाद हल्की बारिश भी ना होने से निजी जल स्त्रोतों की मदद से सिंचाई करना पड़ रहा है। एक सप्ताह के भीतर बारिश नही हुई तो फसलों को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा।

रोपाई भी नहीं
किसान परमानंद रात्रे ने बताया कि डबरी में पानी नाममात्र का है इस वजह से धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। रोपाई करने के लिए खेत में पूरा पानी भरना पड़ता है। लेकिन पानी की कमी से यह कर पाना संभव नहीं है।

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तीन साल से सावन में भारी बारिश
बीते तीन वर्षों की स्थिति पर गौर करें तो सावन में भारी बारिश ने किसानों ने उम्मीदें जगाई हैं। पिछले साल भी यही स्थिति कायम थी, लेकिन इस बार जुलाई महीने में लंबे समय से मानसून ब्रेक जैसे हालात हुए हैं,जो कि चिंता का विषय है। किसान भाइयों को अब भी अच्छी बारिश की उम्मीदें है।

रायपुर डीडीए आरके कश्यप ने कहा, लगातार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की जांच की निगरानी की जा रही है। पूरी तरह से नमी खत्म नहीं हुई है, लेकिन 26 फीसदी का अंतर है। अभी एक सप्ताह पौधों को कुछ नहीं होगा। इसके बाद ही स्थिति खराब होगी।

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कृषि की फैक्ट फाइल
खरीफ फसलों की बुआई का लक्ष्य-48 लाख 20 हजार हेक्टेयर रकबे में
अब तक कुल बुवाई-23 लाख 48 हजार 660 हेक्टेयर रकबे में

बुआई की स्थिति
धान-19 लाख 68 हजार 530 हेक्टेयर में
अन्य अनाज की फसले-3 लाख 36 हजार 70 हेक्टेयर में
दलहन-1 लाख 2 हजार 30 हेक्टेयर में
तिलहनी-77 हजार 590 हेक्टेयर में
साग-सब्जी व अन्य फसले -63 हजार 740 हेक्टेयर रकबे में
(नोट-आंकड़े 9 जुलाई तक की स्थिति में)

यहां उम्मीदों से कम बारिश
जिला-सामान्य बारिश-वर्तमान आंकड़े-अंतर
बालोद-363.7-322.4- (-11 फीसदी)
सरगुजा- 463-307- (-34 फीसदी)
राजनांदगांव-338-285-(-16 फीसदी)
रायगढ़- 432-306-(-29 फीसदी)
मुंगेली- 347-259-(-25 फीसदी)
कोरिया-412-325-(-21 फीसदी)
कांकेर-411-326-(-21 फीसदी)
जशपुर-522-369-(-29 फीसदी)
दंतेवाड़ा-431-298 (-31 फीसदी)
बस्तर- 423-307-(-27 फीसदी)
(नोट-आंकड़े 1 जून से 17 जुलाई तक)

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