16 हजार से अधिक शिक्षाकर्मियों को इस वर्ष नहीं मिलेगा एरियर्स

संविलियन होने के बाद भी इस शिक्षाकर्मियों को इस बार वर्तमान वर्ष में प्रावधानित राशि से किसी प्रकार के एरियर्स राशि का भुगतान नहीं किया जाएगा।

By: Bhawna Chaudhary

Published: 07 Sep 2020, 08:03 AM IST

रायपुर. प्रदेश में 1 नवम्बर को 16 हजार 278 शिक्षाकर्मियों का संविलियन हो जाएगा, इसमें आठ साल और दो साल की सेवा पूरी करने वाले शिक्षाकर्मी शामिल हैं। संविलियन होने के बाद भी इस शिक्षाकर्मियों को इस बार वर्तमान वर्ष में प्रावधानित राशि से किसी प्रकार के एरियर्स राशि का भुगतान नहीं किया जाएगा। कोरोना संक्रमण की वजह से आर्थिक मितव्यययिता बरतने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग के बजट में अन्य कटौती भी की गई है।

सरकार के इस फैसले के बाद लोक शिक्षण संचालक ने इस संबंध में पंचायत और नगरीय प्रशासन विभाग को निर्देश जारी कर दिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के बीच हुई चर्चा में यह बात सामने आई कि शिक्षाकर्मियों के वेतन के लिए करीब 460 करोड़ रुपए के व्यय का प्रावधान रखा गया है। इसका भुगतान कार्यरत 16 हजार 278 शिक्षाकर्मियों को स्थानीय निकायों के माध्यम से किया जा रहा है। संविलियन के बाद अनुदान मद से प्रावधानित राशि की बचत संभावित है। चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया कि वर्तमान वर्ष में प्रावधानित राशि से किसी प्रकार के एरियर्स राशि का भुगतान ना किया जाए। इससे शिक्षाकर्मियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि एरियर्स की राशि बाद में दी जाएगी। मालूम हो कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने आठ साल की सेवा पूरी करने वाले शिक्षाकर्मियों का संविलियन जनवरी और जुलाई में करने का फैसला लिया था। वर्तमान कांग्रेस सरकार ने आठ साल की जगह दो साल की सेवा अवधि पूरी करने वाले सभी शिक्षाकर्मियों का संविलियन 1 नवम्बर से करने का फैसला लिया। इससे फायदा हुआ था, तो वहुत से शिक्षाकर्मियों को नुकसान भी हुआ।

62.45 करोड़ की कटौती बजट में प्रस्तावित
स्कूल शिक्षा विभाग में वित्तीय वर्ष 2020 21 के लिए 1538944 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इसमें समग्र शिक्षा योजना के लिए 1590 करोड़ शामिल हैं। विभाग द्वारा विभिन्न मदों पर कुल 62.45 करोड़ रुपए की कटौती प्रस्तावित की गई है। विभाग के कुल बजट में से वेतन भत्तों का बजट 1189844 अर्थता 77.31 फीसदी है। इसमें कटौती करने में विभाग ने असमर्थता जताई है।

भुगतान से पहले वित्त विभाग से लेनी होगी अनुमति
वित्त विभाग ने शासकीय विभागों के भुगतान को लेकर भी फिलहाल रोक लगाई गई है। दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग पाठ्यपुस्तक निगम से पुस्तकों की छपाई करवाता है। वहीं गणेवश प्रदान करने के लिए हथकरघा विभाग से मदद लेता है। बैठक में फैसला लिया गया है, कि दोनों विभाग को भुगतान करने से पहले वित्त विभाग की अनुमति ली जाए। इसी प्रकार स्कूलों के वार्षिक अनुदान मद में भी राशि जारी करने पर रोक लगा दी है। वैसे भी कोरोना संक्रमण की वजह से स्कूलों का संचालन नहीं हो पा रहा है।

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