नान घोटाले की सुनवाई रोकने कोर्ट ने किया इंकार, 1 वर्ष में सुनवाई पूरी करने दिया आदेश

साथ ही इसकी सुनवाई 1 वर्ष में पूरी करने का आदेश पारित किया था।

रायपुर. नान घोटाले की सुनवाई रोकने के लिए लगाए गए आवेदन को अदालत ने गुरूवार को खारिज कर दिया है। लेकिन, धारा 173(8) के तहत पूरक चालान पेश करने की अनुमति दी है। विशेष न्याधीश लीना अग्रवाल ने इसका फैसला सुनाया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि नान घोटाले में शामिल मुख्य आरोपी शिवशंकर भट्ट ने 8 मई 2018 को जमानत के लिए आवेदन लगाया था। इसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। साथ ही इसकी सुनवाई 1 वर्ष में पूरी करने का आदेश पारित किया था।

इसे देखते हुए विशेष अदालत मामले की सुनवाई नहीं रोक सकती है। इस मामले में एंटीकरप्शन ब्यूरो की ओर से पहले ही चालान और पूरक चालान पेश किया जा चुका है। उनके द्वारा सौंपी गई सूची के आधार पर गवाहों के बयान लिए जा रहे है।

ऐसी स्थिति में एसीबी की ओर से पेश किया गए आवेदन को स्वीकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि राज्य सरकार के निर्देश पर 7 जनवरी 2019 को एसीबी के उपपुलिस अधीक्षक विश्वास चंद्राकर ने आवेदन जमा किया था। इस आवेदन में नान घोटाले की जांच करने के लिए 12 सदस्यीय एसआइटी टीम का गठन करने की जानकारी दी गई थी। साथ ही 3 माह में इसकी छानबीन पूरी करने के बाद रिपोर्ट पेश करने का हवाला दिया गया था। इसे देखते हुए नियमित सुनवाई को स्थगित करने का अनुरोध किया गया था।

जांच के लिए स्वतंत्र

नान घोटाले की सुनवाई करने के लिए गठित स्पेशल मजिस्ट्रेट लीना अग्रवाल की अदालत में 9 जनवरी को एसीबी डीएसपी विश्वास चंद्राकर ने आवेदन लगाया था। इसमें एसआइटी टीम का गठन किए जाने की जानकारी दी गई थी। साथ ही प्रकरण की जांच करने के लिए अनुमति देने का अनुरोध किया था। विशेष न्यायधीश ने इसकी सुनवाई करते हुए कहा कि जांच एजेंसी मामले की विवेचना करने के लिए स्वतंत्र है।

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चंदू निर्मलकर Desk
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