अवैध मकान-दुकान निर्माण से नपं को राजस्व की क्षति

खरोरा. शासन-प्रशासन के जिम्मेदार देखते नहीं और स्थानीय निवासी पूछते नहीं की स्थिति नगर पंचायत परिक्षेत्र में बिना अनुमति मकान- दुकान के निर्माण को लेकर है।

खरोरा. शासन-प्रशासन के जिम्मेदार देखते नहीं और स्थानीय निवासी पूछते नहीं की स्थिति नगर पंचायत परिक्षेत्र में बिना अनुमति मकान- दुकान के निर्माण को लेकर है। यहां मकान- दुकान तो तेजी से बन रहे हैं, लेकिन इसके स्थानीय निकाय से विधिवत अनुमति नहीं ली जाती है। इससे स्थानीय निकाय को राजस्व को दोहरा-तिहरा नुकसान हो रहा है। अनुमति शुल्क, संपत्ति कर, समेकित कर, जलकर, वाटर हार्वेस्टिंग आदि का है। नियम विरुद्ध बेतरतीब निर्माण से नगर में अतिक्रमण समस्या भी उत्पन्न हो रही है। संपत्ति कर को लेकर स्थिति यह है कि खरोरा नगर पंचायत क्षेत्र में बीते कई सालों में सर्वे ही नहीं कराया है।
नगर में बिना अनुमति के बनाए गए मकानों का नगर पंचायत में रिकॉर्ड नहीं होने से संपत्ति कर और अन्य उपकर की वसूली नहीं हो पा रही है। भवन-दुकान निर्माण की अनुमति देने के साथ नगर पंचायत की ओर से अनुसार शपथ पत्र भी भवन निर्माता से लिया जाता है, लेकिन चूंकि प्रक्रिया का पालन ही नहीं हो रहा तो सब नियम कायदे किताबों तक ही सीमित हैं।
खरोरा में कई साल से नहीं हुआ राजस्व सर्वे: नगर पंचायत खरोरा की ओर से नगर में बनाए जा रहे नवीन भवनों-दुकानों का पिछले कई साल से सर्वे नहीं कराया गया है। इसके चलते नगर पंचायत नवीन भवनों दुकानों का रिकॉर्ड भी मेंटेन नहीं कर पा रही है और न ही भवन स्वामियों से कर वसूल हो पा रहा हैं, जिसके कारण नपं को मिलने राजस्व की क्षति हो रही है।
स्थानीय निकायों को हो रही राजस्व की हानि: नगर परिषद के अधिकारियों की की ओर से न तो भवन निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया जाता है। इस वजह से बिना अनुमति के बेरोकटोक निर्माण कार्य चलता रहता है और स्थानीय निकाय के पास उनका कोई रिकॉर्ड नहीं रहता। इसके चलते नगर परिषद को भवन निर्माण की अनुमति शुल्क से लेकर विभिन्न प्रकार के टैक्स से मिलने वाले राजस्व का नुकसान हो रहा है।
खरोरा नगर पंचायत को हर वर्ष बिना अनुमति वाले एक मकान पर करीब दो से तीन हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। जो लोग अनुमति लेते हैं उन्हें नगर पंचायत से पानी व नल कनेक्शन भी लेना होता है। लेकिन जो व्यक्ति अनुमति नहीं लेता है तो वह अवैध रूप से नल कलेक्शन ले लेता है। इससे भी नगर पंचायत को हर माह एक अवैध मकान पर हजारों रुपए का नुकसान होता है। यदि इसकी पड़ताल कर आंकलन किया जाए तो राजस्व का नुकसान लाखों रुपए में हो
सकता है।
बेतरतीव बढ़ रहा रिहायशी इलाका: टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों के तहत ही रिहायशी या व्यवसायिक क्षेत्र विकसित होना चाहिए। लेकिन नियम कायदे ताक पर रखकर मनमर्जी से निर्माण कार्य होने से बेतरतीव रिहायशी क्षेत्र बढ़ रहा है। मकानों में दुकानें भी मनमर्जी से निकाल ली जाती हैं। भूखंड के क्षेत्रफल के अतिरिक्त भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कर लिया जाता है। इससे सड़कें संकरी होने की समस्या उत्पन्न हो रही है। स्थानीय निकाय सर्वे कराकर यह पता लगा सकते हैं कि कितने मकान बिना अनुमति बनाए गए हैं और कब से बने हैं।

अवैध भवन-दुकान निर्माण के संबंध में नपं मानीटरिंग कर बगैर एनओसी लिए जो भी निर्माण कर किया या कर रहा है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सतीश यादव, सीएमओ, नपं खरोरा

dharmendra ghidode
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