यहां माओवादियों का डर इतना, हेलीकॉप्टर से आता है जवानों का राशन, बारिश में ऐसी होती खुद की सुरक्षा

यहां माओवादियों का डर इतना, हेलीकॉप्टर से आता है जवानों का राशन, बारिश में ऐसी होती खुद की सुरक्षा

Chandu Nirmalkar | Publish: Jul, 16 2018 09:29:37 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

माओवादी हिंसा के चलते दो राज्यों की सीमा पर बना प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण थाना बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहा है।

आकाश शुक्ला@रायपुर. माओवादियों का गढ़ बन चुके बीजापुर में विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा में बने पामेड़ थाना में आज भी हेलीकॉप्टर से राशन पहुंचाना पड़ता है। जी हां माओवादी हिंसा के चलते दो राज्यों की सीमा पर बना प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण थाना बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहा है। हालात इतने खराब हैं, कि यहां सड़क तो दूर, पगडंडी से पहुंचना भी पहाड़ चढऩे के बराबर है। सरकारी तंत्र और विकास घने जंगलों के बीच कब का दम तोड़ चुकी है। 34 साल बाद भी पामेड़ थाना का आज तक खुद का भवन नहीं बन पाया है। पहली बार पत्रिका की टीम पहुंचकर इस दुर्गम थाने का जायजा लिया तो विकास अंधकार में बदला नजर आया।

ग्रामीणों के लिए भी हेलीकाप्टर से आता है राशन
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर बसा प्रदेश का अंतिम ग्राम पामेड़ थाने की हालत बद से बदतर है। सड़क मार्ग से कटे होने के कारण यहां वर्षभर आपदा की स्थिति बनी होती है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आज भी जवानों के साथ ही ग्रामीणों के लिए भी राशन हेलीकॉप्टर से पहुंचता है। आवास, पानी, बिजली जैसे मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे जांबाजों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी मोहताज होना पड़ रहा है। हद तो तब हो जाती है, जब 1984 में स्थापित थाने का आज तक भवन निर्माण नहीं हो पाता। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पुलिस बल माओवादियों से लोहा लेते डटे हुए हैं।

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बिजली की भी सुविधा नहीं..
पामेड़ थाना में पदस्थ एसआई हृदय शंकर पटेल ने बताया कि पुलिस बल के लिए हेलीकॉप्टर से समय-समय पर राशन भेज दिया जाता है। साथ ही जवानों को छुट्टी पर जाने व अन्य कार्यों से मुख्यालय जाने के अलावा तबियत बिगडऩे की स्थिति में भी चॉपर का ही सहारा लेना पड़ता है। क्षेत्र में बिजली की सुविधा नहीं होने की वजह से जनरेटर से काम चला रहे हैं। वह भी आए दिन दगा दे जाता है। उन्होंने बताया कि माओवादी क्षेत्र व यहां की संवेदनशीलता को देखते ही जिला पुलिस बल बढ़ाने की भी आवश्यकता है।

जवानों ने बताया कि थाने के बैरक में सभी के रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऊपर से बारिश के कारण छप्पर से पानी टपकता रहता है। जो अधिक परेशानी पैदा करता है। जैसे तैसे जवान रह रहे हैं। सरकार को यहां पर्याप्त आवास, बिजली, पानी व स्वास्थ्य सुविधा को बढ़ाना चाहिए।

तेलंगाना से कर रहे पावर शेयरिंग एग्रीमेंट, भवन का भी जल्द होगा निर्माण
पत्रिका से बातचीत में बीजापुर एसपी मोहित गर्ग कहा कि यह तो सच है कि हमारे जवान आवास, बिजली व स्वास्थ्य सुविधाओं से जूझ रहे हैं। कोल्ड स्टोरेज नहीं होने की वजह से दवाओं के साथ ही अन्य सामग्री नहीं रख पाते। जनरेटर से ही काम चल रहा है। लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। चूंकि छत्तीसगढ़ की बिजली लाइन बासागुड़ा और उसूर तक ही पहुंची है।

सुकमा के कुछ क्षेत्रों में जिस तरह तेलंगाना सरकार से अनुबंध के तहत बिजली सप्लाई हो रही है। उसी प्रकार पामेड़ क्षेत्र में भी बिजली के लिए तेलंगाना सरकार से पॉवर शेयरिंग एग्रीमेंट किया जा रहा है। बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। इसके होने के बाद पामेड़ थाने के साथ ही पूरे क्षेत्र में बिजली की व्यवस्था दुरूस्त हो जाएगी। जहां तक भवन निर्माण की बात है तो उसका काम भी बारिश के बाद शुरू किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ शासन को जवानों की चिंता है। बिजली, पानी, आवास और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत सुविधा को लेकर सरकार गंभीर है। पहले वहां सड़क नहीं थी, लेकिन अब सड़क निर्माण भी पूर्णता की ओर है, जो विकास का रास्ता खोल रही है। जल्द ही थाना भवन का निर्माण किया जाएगा। जवानों के साथ ही ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य के अलावा अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।
रामसेवक पैकरा, गृहमंत्री, छग शासन

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