इस जिले के गैस उपभोक्ताओं के लिए खड़ी हुई ये नई समस्या, नहीं मिल रहा नया सिलेंडर

अधिकांश गैस चूल्हे एक बार उपयोग के बाद लगभग ठंडे पड़ गए हैं।

By: चंदू निर्मलकर

Published: 07 Jun 2018, 05:43 PM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के गैस उपभोक्ताओं के लिए एक नई समस्या खड़ी हो गई। यहां एलपीजी गैस कनेक्शनों की संख्या लगातार बढ़ती तो जा रही है लेकिन इस अनुपात में गैस एजेंसियों में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। आलम यह है कि गैस उपभोक्ताओं को एक गैस खत्म हो जाने के बाद दूसरा सिलेंडर लेने के लिए भारी तकलीफों का सामना करना पड़ा रहा है।

जिले में एलपीजी गैस कनेक्शनों की संख्या करीब दो लाख तक पहुंच गई है। वहीं, वर्तमान में जिले में सिर्फ 13 गैस एजेंसियां हैं। ग्रामीण अंचल के लोगों को रिफलिंग के लिए अब भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए प्रशासन ने दूरस्थ इलाकों में रिफलिंग के लिए मोबाइल वैन सेवा शुरू किए जाने के बाद उज्ज्वला कनेक्शन के रिफलिंग स्तर में सुधार तो हुआ है, फिर भी 77 प्रतिशत उज्ज्वला कनेक्शन वाले रिफलिंग नहीं करा पा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार जिले में एलपीजी के 74141 सामान्य कनेक्शन हैं। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत अब तक 1 लाख 24 हजार 855 कनेक्शन बांटे जा चुके हैं। दोनों को मिलाकर एक लाख 98 हजार 996 गैस कनेक्शन जिले में दिए गए हैं। सामान्य कनेक्शनों की रिफलिंग बराबर हो रही है, क्योंकि ये अधिकांशत: शहरी इलाकों और आसपास सक्षम परिवारों के पास हैं तथा रिफलिंग के लिए ज्यादा दिक्कत नहीं है। लेकिन उज्ज्वला योजना के तहत दिए गए अधिकांश गैस चूल्हे एक बार उपयोग के बाद लगभग ठंडे पड़ गए हैं।

मोबाइल वैन की सुविधा शुरू

ग्रामीण अंचल में गैस रिफलिंग की दिक्कतें और हितग्राहियों की आर्थिक कमजोरी के साथ-साथ रसोई के ईंधन के रूप में लकड़ी की अपेक्षाकृत आसान उपलब्धता इसके प्रमुख कारण बताए जाते हैं। बड़े पैमाने पर उज्ज्वला के गैस कनेक्शन वितरण के बाद उपभोक्ताओं की दिक्कतों को देखते हुए प्रशासन ने दूरस्थ ग्रामीण अंचलों के लिए मोबाइल वैन की सुविधा शुरू की है। गैस एजेंसियों के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके तहत रिफलिंग के लिए मोबाइल वैन दूरस्थ ग्रामीण अंचल के हाट-बाजारों में नियत तिथि को पहुंच रही हैं।

व्यवस्था में कमी

खाद्य विभाग के अफसरों का कहना है कि ऐसे साप्ताहिक हाट-बाजारों का चिह्नांकन कर रूट चार्ट तैयार किया गया है, जिसके अनुसार मोबाइल वैन रिफलिंग के लिए पहुंच रही हैं। इसके चलते उज्ज्वला के रिफलिंग प्रतिशत में सुधार हुआ है। कुछ महीने पहले तक उज्ज्वला का रिफलिंग प्रतिशत बमुश्किल 16 प्रतिशत के आसपास था, जो बढ़कर अब 33 प्रतिशत हो गया है। लेकिन 77 प्रतिशत उज्ज्वला कनेक्शनों की रिफलिंग नहीं होना, कहीं न कहीं व्यवस्था में कमी को उजागर करता है।

छह स्थानों पर नए वितरण केन्द्रों का प्रस्ताव
जिले में कुछ महीने पहले तक केवल 10 एजेंसियां थी, लेकिन पटेवा, कोमाखान और सिरपुर में सोसाइटियों के माध्यम से गैस वितरण केन्द्र प्रारंभ किए जाने से इन क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली। हालांकि अन्य ग्रामीण क्षेत्रों की कई और सोसाइटियों से भी मांग की जा रही थी। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत जिस बड़ी संख्या में रसोई गैस कनेक्शन दिए गए हैं, उससे जिले में एलपीजी कनेक्शनों की संख्या दो साल की तुलना में करीब चार गुना हो गई है। ऐसे में गैस एजेंसियों का वितरण केन्द्रों में बढ़ोतरी की आवश्यकता महसूस की जा रही है। प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए जिले में छह स्थानों के लिए प्रस्ताव दिया है।

जिले के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में गैस रिफलिंग के लिए मोबाइल वैन चलाए जा रहे हैं। इसके लिए रूट चार्ट बनाए गए हैं। साप्ताहिक हाट-बाजारों के दिन रिफलिंग वैन पहुंच रही है। इसके अलावा छह स्थानों पर नए केन्द्र प्रस्तावित है।
अजय यादव, जिला खाद्य अधिकारी, महासमुंद

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चंदू निर्मलकर Desk
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