रिपोर्ट कार्ड : विधानसभा में पहली बार चुनकर आए, पर चुप नहीं बैठे अधिकतर विधायक

रिपोर्ट कार्ड : विधानसभा में पहली बार चुनकर आए, पर चुप नहीं बैठे अधिकतर विधायक

Deepak Sahu | Publish: Sep, 06 2018 12:21:30 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

भाजपा नेताओं नए विधायकों में से 30 प्रतिशत का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है वहीं कांग्रेस नेता नए विधायकों में से 55 प्रतिशत को ए ग्रेड दे रहे हैं

मिथिलेश मिश्र@रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए 2013 में हुए चुनाव अपने नतीजों में काफी रोचक रहा। कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। वहीं 53 लोग पहली बार विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे। इनमें से 28 भाजपा, 23 कांग्रेस, एक बसपा के टिकट पर और एक निर्दलीय के तौर पर चुने गए थे। इनमें भाजपा की 5 और कांग्रेस से 3 विधायक महिलाएं थीं।

90 सदस्यों वाली विधानसभा में इतने नए लोगों की वजह से आशंकाएं उपजीं। राजनीतिक पंडितों को लगा कि विधानसभा और उसके बाहर नए चेहरों की राजनीतिक सक्रियता कम रहेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पहली बार चुनकर आए विधायकों में से अधिकतर चुप नहीं बैठे। सदन में भी आवाज उठाई और बाहर भी। भाजपा नेताओं की माने तो उनके नए विधायकों में से 30 प्रतिशत का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। वहीं कांग्रेस नेता अपने नए विधायकों में से 55 प्रतिशत को ए ग्रेड दे रहे हैं। बसपा के एकमात्र विधायक ने भी अच्छी छाप छोड़ी है।

...और मिली बड़ी जिम्मेदारी
भाजपा ने पहली बार आए चंपा देवी पावले, सुनीती राठिया, शिवशंकर पैकरा, लखन देवांगन, तोखन साहू, अम्बेश जांगड़े, रूप कुमारी चौधरी, गोवर्धन सिंह मांझी, लाभचंद्र बाफना और मोतीराम चंद्रवंशी को संसदीय सचिव बनाया। भोजराज नाग को बस्तर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष। कांग्रेस ने पहली बार चुने गए उमेश पटेल को युवक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया। वहीं देवती कर्मा को कई चुनावी समितियों में जगह दी।

इस उम्र वर्ग से आये नए विधायक

आयु वर्ग भाजपा कांग्रेस
25-35 25 01
36-50 16 09
51 से अधिक 12 13

इनके तो साथ ही चलता रहा विवाद
कांग्रेस के टिकट पर चुनकर आए अमित जोगी और आरके राय ने दो साल बाद ही अलग राह पकड़ ली। सदन के भीतर और बाहर कांग्रेस के खिलाफ ही मोर्चा खोल बैठे। जोगी निष्कासित हुए तो राय को निलंबन का सामना करना पड़ा। राज्यसभा चुनाव के समय मतदान का बहिष्कार किया। कांग्रेस ने दोनों की सदस्यता खत्म करने का आवेदन दिया है।

40 प्रतिशत भाजपा के वर्तमान विधायकों को दोबारा टिकट मिल सकता है।
60 प्रतिशत कांग्रेस के अधिक वर्तमान विधायकों को टिकट मिलने का अनुमान

अधिकतर को दोबारा भी मौका
भाजपा नेताओं का कहना है कि नए में से कम से कम 40 फीसद को दोबारा टिकट मिल सकता है। वहीं कांग्रेस में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से अधिक का बताया जा रहा है। बसपा के एकमात्र विधायक को दोबारा टिकट मिलना तय माना जा रहा है।

इनके तो साथ ही चलता रहा विवाद
कांग्रेस के टिकट पर चुनकर आए अमित जोगी और आरके राय ने दो साल बाद ही अलग राह पकड़ ली। सदन के भीतर और बाहर कांग्रेस के खिलाफ ही मोर्चा खोल बैठे। जोगी निष्कासित हुए तो राय को निलंबन का सामना करना पड़ा। राज्यसभा चुनाव के समय मतदान का बहिष्कार किया। कांग्रेस ने दोनों की सदस्यता खत्म करने का आवेदन दिया है।

टिकट के लिए ऐसी तैयारी
कांग्रेस : आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस स्वच्छ छवि और युवा कार्यकर्ताओं पर दांव खेलने की तैयारी में है। पिछले अनुभव के आधार पर कुछ प्रत्याशियों का टिकट कटना तय है। टिकट वितरण से पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सर्वे करवा कर यहां की जनता का मन टटोला है।

भाजपा : मतदाताआं की नाराजगी को देखते हुए भाजपा ने नए प्रत्याशियों पर ज्यादा दांव खेला है। माना जा रहा है कि इस बार भी मौजूदा विधायकों में ४० फीसदी का टिकट कटना तय है। पार्टी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया कि हमारे यहां व्यक्ति नहीं, बल्कि संगठन चुनाव लड़ता है। भाजपा का भी सर्वे लगभग पूरा हो गया है।

इन विधायकों ने बनाई अलग पहचान

 

vidhansabha assembly election

नवीन मारकंडेय
भाजपा की युवा विंग से आए नवीन मारकंडेय आरंग के विधायक हैं। विधानसभा की कार्रवाइयों में सक्रिय रहे। क्षेत्र में लोगों से संपर्क करने का अलग तरीका बनाया।

 

vidhansabha assembly election

अमित जोगी
कांग्रेस के टिकट पर मरवाही से जीतकर आए। सदन के भीतर खास शैली में सरकार पर हमला करने के लिए जाने गए। सदन के बाहर अपने ही दल के खिलाफ रहे।

 

vidhansabha assembly election

बृहस्पति सिंह
रामानुजगंज से कांग्रेस के विधायक। क्षेत्र के मुददों को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर सक्रिय। तमाम रोकटोक के बावजूद अपनी खास शैली में बात कहने की जगह बनाने के लिए मशहूर हो गए।

 

vidhansabha assembly election

मोहन मरकाम
कोण्डागांव से कांग्रेस विधायक। विधानसभा में मुददे की पूरी तैयारी कर आने वालों में शुमार। क्षेत्र में भी लोगों के बीच पहुंचने के लिए बेरीकेड तोड़े। ग्रामीणों के साथ खुद श्रमदान किया।

 

vidhansabha assembly election

विमल चोपड़ा
महासमुंद से निर्दलीय विधायक। अपनी शराब विरोधी मुहिम को विधानभवन तक ले आए। हर सत्र में शराब विरोधी स्लोगन लिखा कुर्ता पहनकर आते रहे। क्षेत्र के मुददों पर सरकार को घेरा।

Ad Block is Banned