एनजीटी के आदेश को ठेंगा, खुलेआम चल रहें हैं रेत घाट

अब सभी रेत घाटों में चेनमाउंटन मशीन से ट्रेक्टरों को लोडिंग दी जा रही है। यह ट्रेक्टर गांव के ही लोगों के हैं। जब ग्रामीणों को उनके ट्रेक्टर पर किराया मिलने लगा तो उनका विरोध समाप्त हो गया। ट्रेक्टर से अवैध डंपिंग यार्ड में रेत डंप कर हाइवा से शहर सप्लाई की जा रही है। अभी एक हजार फिट के हाईवा रेत की कीमत तीस से पैंतीस हजार रुपए है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 07 Sep 2020, 12:07 PM IST

रायपुर. एनजीटी की रोक के बाद भी महानदी से खुलेआम रेत निकाल कर राजधानी में सप्लाई किया जा रहा है। रायपुर के हरदीडीह, कुरुद, चिख्ली और महासमुंद के केडि़याडीह, सिरपुर, कर्राडीह रेत घाट से खुलेआम रेत निकाल कर सप्लाई की जा रही है। अहम बात तो यह है कि माइनिंग चौङ्क्षकयों के सामने गीली रेत ओवर लोड राजधानी पहुंच रही है। लेकिन परिवहन और माइनिंग दोनों विभाग कार्रवाही नहीं कर रहे हैं। अवैध खनन को लेकर ग्रामीणों ने विरोध किया तो माफियाओं ने इसका हल निकला लिया है।

अब सभी रेत घाटों में चेनमाउंटन मशीन से ट्रेक्टरों को लोडिंग दी जा रही है। यह ट्रेक्टर गांव के ही लोगों के हैं। जब ग्रामीणों को उनके ट्रेक्टर पर किराया मिलने लगा तो उनका विरोध समाप्त हो गया। ट्रेक्टर से अवैध डंपिंग यार्ड में रेत डंप कर हाइवा से शहर सप्लाई की जा रही है। अभी एक हजार फिट के हाईवा रेत की कीमत तीस से पैंतीस हजार रुपए है।

ओवर लोडिंग पर कार्रवाही नहीं

जबकि कुछ दिन पहले ही परिवहन मंत्री ने ओवर लोड पर एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद भी परिवहन विभाग ना तो ओवर लोड पर कार्रवाही कर रहा है ना ही खनिज विभाग बिना रायल्टी के खनिज चोरी पर। यदि एक हाइवा पर ओवरलोड की कार्रवाई की जाती है तो 55 से 60 हजार रुपए अतिरिक्त जुर्माना शासन को मिलेगा। लेकिन, परिवहन और खनिज विभाग के तालमेल नहीं होने का फायदा अवैध खनिज परिवहन करने वालों को मिलता है।

कार्रवाई के पहले ही खाली जाते हैं रेत घाट

कार्रवाई के पहले ही जिले के रेत माफियाओं को इसकी भनक लग जाती है। होने वाली कार्रवाई की जानकारी खुद खनिज विभाग के सूत्रों ने माइनिंग माफिया को मिल जाती है। जिसके बाद रेत घाटों से चेन माउंटिंग मशीनें गायब हो जाती है। ट्रक भी घाटों में दिखाई नहीं दिए। इसके बाद फिर रात खनन शुरू हो जाता है।

पर्यावरण अनुमति भी एक्सपायर

पूर्व में रेत घाटों का ठेका लेने वाली कंपनियों को पर्यावरण की अनुमति का प्रमाण पत्र भी अब एक्सपायर हो गया है। रेत तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि सीएम के कड़े रुख और एनजीटी के आदेशों की भी परवाहड्डनहीं कर रहे हैं। इधर, अवैध खनन होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन के साथ ही खनिज विभाग का अमला संबंधित ठेका कंपनियों समेत उत्खननकर्ताओं पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।

15 अक्टूबर तक रोक

एनजीटी द्वारा प्रदेश सरकार के नए रेत नियमों के तहत 10 जून से 15 अक्टूबर तक खनन करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस मामले में ठेका लेने वाली कंपनियों को पर्यावरण की अनुमति का प्रमाण पत्र अब एक्सपायरी हो गया है।

खनन पर प्रतिबंध

एनजीटी द्वारा पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि संबंधित कंपनी को पर्यावरण का प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है। वर्तमान में रेत का उत्खनन बेतरतीब तरीके से किया जा रहा था। रेत खनन माफियाओं द्वारा आदेश की अवहेलना की गई। मंगलवार को एनजीटी ने रेत के खनन पर रोक लगाए जाने के निर्देश जारी कर दिए थे। रेत खनन को लेकर रात में रायल्टी जारी करना एनजीटी के आदेश के अलावा कलेक्टर के आदेश की भी अवहेलना है।

इन रेत घाटों में बेखौफ उत्खनन

रायपुर के हरदीडीह, कुरुद, चिख्ली, मुमेला-कुटेला, रेत घाट में खुलेआम खनन का काम चल रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि अवैध खनन खुलेआम दिन-रात जारी है। माइनिंग चौकियों पर भी इन्हें रोका नहीं जाता है।

खनिज विभाग को लगातार निगरानी करने को कहा गया हैं। जो लोग भी रेत घाट में खनन व परिवहन कर रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

- डॉ.एस.भारतीदासन, कलेक्टर, रायपुर

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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