पीलिया के बढ़ते प्रकोप का हैं यह भी एक कारण, निगम नहीं कर रहा निर्देशों का पालन

पीलिया के बढ़ते प्रकोप का हैं यह भी एक कारण, निगम नहीं कर रहा निर्देशों का पालन

Deepak Sahu | Updated: 03 May 2018, 02:28:34 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

पानी सप्लाई की टंकी की सफाई वर्ष भर से नहीं की गई है।

रायपुर . पिछले दो माह से राजधानी में फैल रहे पीलिया को कोर्ट ने आपदा तो घोषित कर दिया है, पर निगम प्रशासन अब भी इससे हो रही मौतों को हल्के में ले रहा है। संक्रमण के लिए पानी को जिम्मेदार पाने के बावजूद निगम की ओर से क्षेत्र में 15 हजार लोगों के लिए पानी सप्लाई की टंकी की सफाई वर्ष भर से नहीं की गई है। इतना ही नहीं प्रभावित क्षेत्र में पाइपों को नालियों से ऊपर करने का कार्य भी सिर्फ दिखावे के लिए ही चल रहा है।

'पत्रिका' टीम ने बुधवार दोपहर 12 बजे मोवा नहरपारा व कांपा क्षेत्र का जायजा लिया। जिसमें निगम की ओर से बरती जा रही लापरवाहियों की कलई खुलती गई। टीम ने स्वास्थ्य शिविर में मौजूद स्थानीय पार्षद के साथ भ्रमण किया और बचाव के लिए हुए कार्यों के बारे में जानना चाहा, इस पर वे महज गिनती के ही पाइप लाइन को नाली से ऊपर किए हुए दिखा पाए।

भय से पी रहे मिनरल वाटर
प्रभावित क्षेत्र के हजारों लोगों में पानी का भय इस कदर फैला हुआ है, कि लोग पीने के लिए मिनरल वाटर का उपयोग कर रहे हैं। 'पत्रिका' टीम को कुछ एेसे स्थानीयों ने अपनी व्यथा के साथ बढ़ रहे आर्थिक बोझ को साझा किया। उनका कहना है कि निगम की ओर से टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई तो हो रही है, पर उनका भरोसा इस आपदा के बाद से निगम के ऊपर से उठ गया है।

टंकी से ही शुरू हो जाती है गंदगी
'पत्रिका' टीम ने प्रभावित इलाके में पानी की सप्लाई के लिए बनी पानी की टंकी का जायजा लिया। जिसमें पाइप लाइन और टंकी के सिरे में ही लीकेज मिला। साथ ही जहां से भूमिगत होकर यह लाइन घर-घर पहुंचती है, वहां पसरा गीले कचरे का अंबार दर्शाता है, कि पानी और गंदगी का मेल यहीं से शुरू हो जाता है।

इसके अतिरिक्त इस टंकी की आखिरी बार सफाई पिछले वर्ष के चौथे माह में की गई थी। एेसे में आपदा के दो माह बाद भी टंकी की सफाई न करवाना निगम की असंवेदनशीलता की ओर इशारा करता है।

नहीं हुआ निर्देशों का अनुपालन
पीलिया आपदा पर चार वर्षों से चल रहे इस केस की सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने स्थिति में सुधार के लिए कई निर्देश जारी किए थे, जो कि अब भी लंबित हैं।
1. सभी एनिकटों पर ट्रीटमेंट प्लांट - अब तक नहीं बना
2. पुराने अंडरग्राउंड सीवरेज लाइन को शुरू करना - अधिकारियों के अनुसार संभव नहीं
3. सभी पाइप लाइनों को नालियों से ऊपर करना - दिखावे का कार्य अब भी जारी
4. पानी शुद्धि संयंत्रों में सीसीटीवी की निगरानी में हो जांच - कोई असर नहीं
5. खारुन में मिलने वाले १७ नालों में ट्रीटमेंट प्लांट - एसटीपी अब तक नहीं हो सका शुरू

9 लोगों के हस्ताक्षर को बना रहे आधार
पत्रिका की टीम ने जब उपस्थित लोगों से कोर्ट के शिफ्टिंग के आदेश के बारे में जानना चाहा, तो लोगों ने अविश्वास का भाव जताकर जाने से मना कर दिया। वहीं स्थानीय पार्षद और उनके समर्थकों ने नहीं जाने के लिए हस्ताक्षर अभियान का हवाला दिया, जिसमें 15 हजार रहवासी वाले इस क्षेत्र में महज 9 लोगों के हस्ताक्षर को ही आधार बना कर पूरे क्षेत्र के प्रतिनिधित्व की बात कही गई।

मीडिया कर्मियों से भी हुआ विवाद
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कवरेज के लिए पहुंचे विभिन्न मीडिया कर्मियों से भी स्थानीय पार्षद और उनके समर्थकों ने जमकर विवाद किया। समर्थकों ने निगम की कमियों को छुपाते हुए, एक महिला पत्रकार पर अपमानजनक टिप्पणी की। जिस पर मौजूद सभी मीडिया कर्मियों पर स्थानीय दबाव बनाने लगे। इसके बावजूद मीडिया ने अपनी पूरी पड़ताल जारी रखी और सच्चाई उजागर की।

बना रहे व्यवस्था
वार्ड क्रमांक -27 के अनवर हुसैन ने बताया निगम की ओर से रोजाना प्रति टैंकर 5-8 राउंड सप्लाइ की जा रही है। इसके अतिरिक्त पाइप लाइनों को ऊपर किया जा चुका है, जबकि नई पाइप लाइनों का कार्य अब भी बाकी है।

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