नुकसान: कोरोनाकाल के दौरान कारोबारियों ने नहीं खोली दुकान, अब सफारी प्रबंधन करेगा कैंटीन का डिपॉजिट वापस

वन विभाग को हुआ 1 लाख 80 हजार रुपए का घाटा

By: Nikesh Kumar Dewangan

Published: 28 Feb 2021, 07:01 PM IST

रायपुर. कोरोना संक्रमण ने जंगल सफारी प्रबंधन की आय का ग्राफ गिरा दिया है। प्रबंधन की हालत कुछ इस तरह खराब है कि उन्हें अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देखने के लिए वन अधिकारियों का मुंह देखना पड़ रहा है।

आर्थिक संकट से जूझ रहा जंगल सफारी प्रबंधन कारोबारियों का कर्जदार हो गया है। सफारी प्रबंधन को 9 कारोबारियों को 1 लाख 80 हजार रुपए देना है। कारोबारियों का पैसा वापस किया जा सके, इसलिए सफारी प्रबंधन के जिम्मेदारों ने वन अफसरों को पैसा रीलिज करने के लिए प्रपोजल भेजा है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो प्रपोजल को हरी झंडी मिलने के बाद कारोबारियों द्वारा जमा किया गया पैसा वापस कर दिया जाएगा।

जंगल सफारी परिसर में आने वाले पर्यटकों को खाना-पानी की कमी ना हो, इसलिए जंगल सफारी प्रबंधन ने ओपन फूड कोर्ट निर्माण करने का टेंडर जारी किया था। इस टेंडर में दर्जनों कारोबारियों ने शिरकत की और 11 कारोबारियों की उनकी क्षमता के हिसाब से कारोबार संचालित करने का मौका सफारी प्रबंधन ने दिया। 11 कारोबारियों में से 2 कारोबारियों ने तत्काल काम शुरू कर दिया, लेकिन कोरोना संकट की वजह से पूरे साल 9 अन्य कारोबारी सफारी परिसर में अपनी कैंटीन नहीं लगा पाए। अप्रैल माह में फूड कोड का नया टेंडर होना है, इसलिए कारोबारियों ने दुकान खोलने के बजाए अपना डिपॉजिट वापस सफारी प्रबंधन से मांगा है। कारोबारियों की मांग पर सफारी प्रबंधन डिपाजिट वापस करने की तैयारी कर रहा है।

प्रति दुकान 20 हजार किया था डिपॉजिट

सफारी प्रबंधन के जिम्मेदारों की मानें तो कारोबारियों ने प्रति दुकान 20 हजार रुपए डिपॉजिट किया गया था। दुकान संचालित ना कर पाने के एवज में कुछ दिन पूर्व कारोबारियों ने शुल्क वापसी का आवेदन लगाया है। सभी कारोबारियों का आवेदन आ जाने के बाद विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखा है। अधिकारियों का निर्देश मिलते ही पैसा वापस कर दिया जाएगा।

जंगल सफारी डायरेक्टर एम. मर्सीबेला ने बताया कि ओपन फूड कोर्ट में दुकान का संचालित करने पूर्व सत्र में टेंडर हुआ था। कोरोना की वजह से कारोबारी अपना कारोबार संचालित नहीं कर पाए, इसलिए उन्होंने पैसा वापस मांगा है। उनका पैसा वापस देने की प्रक्रिया की जा रही है।

Nikesh Kumar Dewangan Desk
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