धोखाधड़ी करने वाले बाबू की वेतन वृद्धि रोककर की खानापूर्ति

- बाबू ने पंजीयक बनकर कर दी थी फर्जी रजिस्ट्री .

By: Bhupesh Tripathi

Published: 30 Aug 2020, 07:03 PM IST

रायपुर. रजिस्ट्री में पंद्रह वर्ष पहले हुई बड़ी गड़बड़ी के मामले में बाबू पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। पंद्रह साल से न्याय के लिए लड़ रहे पीडि़त अब न्याय के लिए मामले को न्यायालय में जाने की तैयारी कर रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार रायपुर पंजीयक ने जो जांच प्रतिवदेन महानिरीक्षक के पास भेजा है, उसमें आरोपी बाबू को वेतन वृद्धि रोककर छोड़ दिया गया है। जबकि, इससे पहले भी बलौदाबाजार पंजीयक ने भी अपने जांच में बाबू को आरोपी बताया था। उल्लेखनीय है कि 25 अक्टूबर 2004 को भाटापारा के उप पंजीयक के अवकाश पर होने का फायदा उठाकर लिपिक संजय ने उप पंजीयक भाटापारा की जगह फर्जी व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री कर धोखाधड़ी को अंजाम दिया था। जब 2018 में मामले की जानकारी जमीन के असली मालिक को हुई, तो उन्होंने शिकायत की। लेकिन, दो वर्षों की जांच के बाद कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई। मामले में जांच अधिकारी आरएल साहू का कहना है कि उन्होंने जांच रिपोर्ट पंजीयक महानिरीक्षक को प्रस्तुत कर दी है।

पहले भी हो चुका है आरोप तय
पंजीयन नियम 1919 के नियम (19) और कार्यपालिका अनुदेश की कंडिका-244 के प्रावधानों के अनुसार पंजीयक अधिकारी द्वारा पक्षकारों को रेकार्ड दुरुस्त करके दोबारा पंजीयन के लिए दिया जाना चाहिए था। लेकिन विभाग के अधिकारी और बाबू ने निर्धारित प्रावधानों की अनदेखी की।

सिर्फ पटवारी पर धोखाधड़ी का मामला
मामले में बिना तहसीलदार के आदेश के पटवारी ने फर्जी बी-1 बना दिया। मामला सही पाए जाने के बाद आरोपी पटवारी के खिलाफ भाटापारा थाने में धारा 420, 467-68 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी बाबू को पंजीयन विभाग के आला अधिकारी बचाना चाहते हैं। इसलिए सिर्फ दिखावे की कार्रवाई करके अभयदान दे दिया।

Bhupesh Tripathi
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