कोरोनाकाल में शुगर, किडनी और ह्रदय रोग जैसी बिमारी से जूझ रहे लोगों को नहीं मिल पा रहा इलाज, गवां रहे हैं जान

ऐसे में सवाल यह है कि नॉन कोविड मरीजों के इलाज में आखिर ऐसी लापरवाही क्यों? सूत्र बताते हैं कि जिलों का पूरा फोकस कोरोना के मरीज हैं। कोविड१९ अस्पतालों के लिए अलग से डॉक्टर, नर्स तो नहीं हैं। जिला मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के डॉक्टर ही तैनात किए गए हैं।

By: Karunakant Chaubey

Published: 02 Aug 2020, 11:42 PM IST

रायपुर. प्रदेश में कोरोना से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कोरोना मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। मगर, अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों को इस दौरान खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सामान्य सर्दी, जुखाम, खांसी, शुगर, हाईपरटेंशन समेय अन्य किसी बीमारी से ग्रसित मरीज कोरोना हो जाने के डर से अस्पताल नहीं आ रहे। अगर, आ रहे हैं तो संक्रमित हो जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जिलों के नॉन कोविड अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं मिलने से उनकी स्थिति बहुत कम समय में गंभीर हो जा रही है और वे जान गवां बैठ रहे हैं।

ऐसे में सवाल यह है कि नॉन कोविड मरीजों के इलाज में आखिर ऐसी लापरवाही क्यों? सूत्र बताते हैं कि जिलों का पूरा फोकस कोरोना के मरीज हैं। कोविड१९ अस्पतालों के लिए अलग से डॉक्टर, नर्स तो नहीं हैं। जिला मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के डॉक्टर ही तैनात किए गए हैं। ऐसे में नॉन कोविड अस्पतालों की व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है। उधर, एम्स रायपुर और डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज लास्ट स्टेज में रेफर हो रहे हैं। निजी अस्पतालों से आधी रात मरीज रेफर किए जा रहे हैं। जो गलत है। यह मु²ा शनिवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा ली गई समीक्षा बैठक में भी उठा। एम्स प्रबंधन द्वारा कहा गया- जिलों में नॉन कोविड मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए।

सामान्य न समझें सर्दी, जुखाम, शुगर को-

विशेषज्ञों ने हर उस मरीज को चेताया है जो सर्दी, जुखाम, खांसी, शुगर, हाईपरटेंशन, हार्ट, कैंसर ससे पीडि़त हैं कि वे इन बीमारियों को हल्के में न लें। तत्काल इलाज करवाएं। क्योंकि इस समय ये भी जानलेवा साबित हो रही हैं।

इसलिए 5149 पदों पर हो रही है भर्ती- महामारी में कोविड और नॉन कोविड अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ की भारी कमी हो रही है। यही वजह है कि सरकार ने 2100 पदों पर सीधी भर्ती और 3449 पदों पर संविदा भर्ती का आदेश निकाल दिया है। जल्द ये पद भरे जाएंगे।

ये मरीज देरी से हुए रेफर-

केस-1

गंभीर स्थिति में गरियाबंद से रायपुर रेफर

- दाबनाई, रिस्तीगुड़ा गरियाबंद निवासी ५९ वर्षीय पुरुष को गंभीर दशा में बुखार कमजोरी की शिकायत पर ३० जुलाई को रायपुर के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जहां जांच के दौरान मरीज की लिवर, किडनी को सामान्य तरह से फंक्शन नहीं कर रहे थे। मरीज इन सभी बीमारियों के साथ कोरोना संक्रमित भी था। इलाज के दौरान २४ घंटे के भीतर-भीतर उसने दमतोड़ दिया। मौत की वजह मल्टी ऑर्गन फेल्योर और कोरोना संक्रमण पाया गया।

केस-2

अस्पताल लाते-लाते निकल गई जान

सूरजपुर जिले के 20 वर्षीय युवक को सांस लेने में तकलीफ के चलते उसे सीएचसी बिहारपुर लाया गया। जहां से उसे जिला अस्पताल और वहां से मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर किया गया था। युवक सिर्फ सर्दी, जुखाम से पीडि़त था। इस दौरान वह कोरोना संक्रमित हो गया और मेडिकल कॉलेज लाते-लाते रास्ते में उसकी मौत हो गई। यह प्रकरण इसलिए गंभीर है कि युवक को सिर्फ सदी, जुखाम, खांसी और कफ ही था।

अभी भी निजी अस्पतालों से एम्स रेफर हो रहे मरीज-

स्वास्थ्य विभाग ने नियमों के तहत निजी अस्पताल में कोरोना संक्रमित पाए जाने वाले मरीज, तभी एम्स रेफर होंगे जब निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा न हो। दो महीने पहले यह नियम अस्तित्व में आया था। मगर, इसका पालन नहीं हो रहा है। निजी अस्पताल मरीजों को कोरोना संक्रमित पाए जाने पर गंभीर स्थिति में रायपुर रेफर कर दे रहे हैं।

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गंभीर मरीजों को लेने से एम्स ने कभी इनकार नहीं किया। मगर, निजी अस्पताल वाले आधी रात को मरीज भेज रहे हैं। ऐसे मौके पर हम सभी को मिलकर इलाज करने की जररुत है। जिलों में भी नॉन कोविड मरीज को सही उपचार मिलना चाहिए।इलाज न मिलने से वे गंभीर हो जा रहे हैं।

-डॉ. अजॉय बेहरा, कोरोना नोडल अधिकारी, एम्स रायपुर

नॉन कोविड मरीजों को इलाज में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, यह सुनिश्चित किया गया है। सभी जिलों को इससे संबंधित निर्देश दिए गए हैं।

-नीरज बंसोड़, संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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