अब नई तकनीक नहीं गिरने देगी छत्तीसगढ़ में भूजल स्तर,दुर्ग जिले में काम शुरू

उल्लेखनीय है कि गर्मी के मौसम में पानी का संकट एक बड़ी समस्या के रूप में आता है। हालांकि सरकार वर्षा जल संचयन व संरक्षण के लिए प्रयास भी करती है लेकिन जनता के साथ समन्वय की कमी के कारण यह योजना कहींन कहीं सफलता के मामले में पीछे छूट जाती है और बारिश का पानी नदी-नालों के जरिए बह जाता है।

 

By: शिव शर्मा

Published: 24 May 2020, 07:10 PM IST

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरु रूद्रकुमार के मार्गदर्शन में अब राज्य में वर्षा जल को सहेजने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग की उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने राज्य के ग्रीष्म काल में भू-जल स्तर गिरने से पेयजल समस्या से प्रभावित ग्रामों को चिन्हित कर प्राथमिकता के साथ आधुनिक तकनीक से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए थे।
विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए अधिक कारगर और प्रभावी होगी जहां ग्रीष्म काल में भू-जल स्तर गिरने से पेयजल और निस्तार की गंभीर समस्या आती है। इसके तहत व्ही वायर इंजेक्शन वेल रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम दुर्ग जिले के निकुम और अंजोरा ढाबा गांव में इस तकनीक को लगाने के लिए 16 लाख रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। उन्होंने व्ही वायर इंजेक्शन वेल रेन वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक और इसकी कार्य प्रणाली के संबंध में बताया कि इस तकनीक से 2.5 एकड़ क्षेत्र में होने वाली वर्षा जल से 10 एमएलडी अर्थात एक करोड़ लीटर वर्षा जल को जमीन के अंदर इंजेक्ट कर रिचार्ज किया जा सकता है। इस योजना के पूर्ण होने से क्षेत्र के 10 हजार ग्रामीण लाभान्वित होंगे।

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शिव शर्मा
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