एक विवाह ऐसा भी: परिवार नहीं माना, समाज के लोग बन गए बराती-घराती, संविधान की शपथ लेकर हलधर और चिंतामणी एक-दूजे के हुए

इस अनोखी शादी में न तो ढोल नगाड़ों की गूंज थी और ना बारात का शोर। यहां दुल्हा और दुल्हन ने सबसे पहले डॉ. भीमराव अंबेडकऱ की फोटो पर माल्यार्पण किया। एक दुसरे के माथे पर हल्दी और चांवल का टिका लगाया और माला पहनाया। फिर शपथ ली। इस शपथ में समाज और संविधान के साथ देवी देवाताओं, समाज के नेंग, नीतियों को मानते आशीर्वाद लिया।

By: ramdayal sao

Published: 08 Dec 2019, 01:34 AM IST

raipur/ जगदलपुर . मैं हलधर बघेल (लडक़ा)। मैं चिंतामणी बघेल (लडक़ी)। भारत का संविधान और बाबा साहेब आंबेडकर को साक्षी मानकर और समाज प्रमुखों के समक्ष वचन देता/देती हूं कि आज से पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को जीवन भर निभाएंगे। शुक्रवार को तोकापाल के सर्व आदिवासी समाज के भवन में वर-वधू ने कुछ इस तरह संविधान की शपथ ली और हमेशा-हमेशा के लिए एक-दूजे के हो गए। इस अनोखी शादी में न तो ढोल नगाड़ों की गूंज थी और ना बारात का शोर। यहां दुल्हा और दुल्हन ने सबसे पहले डॉ. भीमराव अंबेडकऱ की फोटो पर माल्यार्पण किया। एक दुसरे के माथे पर हल्दी और चांवल का टिका लगाया और माला पहनाया। फिर शपथ ली। इस शपथ में समाज और संविधान के साथ देवी देवाताओं, समाज के नेंग, नीतियों को मानते आशीर्वाद लिया।

समाज ने पहले किया परीक्षण, फिर शादी कराने पर हुए राजी

सर्वआदिवासी समाज के लोगों ने बताया कि उनके पास शादी के लिए आवेदन आया था। आदिवासी समाज के हिसाब से सबसे पहले इनके टोटम (गौत्र) का परीक्षण किया गया। जिसमें लडक़े का बाघ और लडक़ी का बकरा टोटम पाया गया। विषम गौत्र पाने के बाद शादी कराने पर समाज राजी हुआ।
ये रहे मौजूद : जिपं सदस्य रूकमणी कर्मा, जयराम बघेल, नरङ्क्षसह कश्यप, पाकलू करटामी, शंभू कश्यप, महेश कश्यप, भोलाराम मौर्य समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे।

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