अधिकारियों को कोरोना का डर, खननकर्ता बेखौफ

- जिले के खनिज माफियाओं को पहले ही कार्रवाई की भनक लग जाती है। खनिज विभाग के सूत्रों ने माइनिंग माफिया को दे देते हैं। जिसके बाद रेत घाटों से चेन मशीनें गायब हो जाती हैं।

By: Bhupesh Tripathi

Published: 16 Oct 2020, 01:09 AM IST

रायपुर. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा रेत के खनन पर रोक लगाने के बावजूद क्षेत्र में मुरुम और रेत घाटों में दिन रात खनन किया जा रहा है। कोरोना के खौफ के कारण अधिकारी कार्यालय से ही नहीं निकल रहे हैं। इसकी फायदा उठाकर खनन माफिया दिन रात अवैध खनन मे जुटे हुए हैं। लेकिन खनन और परिवहन दोनों पर ही कार्रवाई नहीं हो रही है। परिवहन और खनिज विभाग के तालमेल नहीं होने का फायदा अवैध खनिज परिवहन करने वालों को मिल रहा है।

कार्रवाई के पहले ही खाली हो जाते हैं रेत घाट
जिले के खनिज माफियाओं को पहले ही कार्रवाई की भनक लग जाती है। खनिज विभाग के सूत्रों ने माइनिंग माफिया को दे देते हैं। जिसके बाद रेत घाटों से चेन मशीनें गायब हो जाती हैं। ट्रक भी घाटों में दिखाई नहीं देते। इसके बाद फिर रात से खनन शुरू हो जाता है।

पूर्व में रेत घाटों का ठेका लेने वाली कंपनियों को पर्यावरण की अनुमति का प्रमाण पत्र भी अब एक्सपायरी हो गया है। रेत तस्करों के हौसले इतने बुलंद है कि सीएम के कड़े रुख और एनजीटी के आदेशों की भी परवाह नहीं कर रहे हैं। इधर अवैध खनन होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन के साथ ही खनिज विभाग का अमला संबंधित ठेका कंपनियों समेत उत्खननकर्ताओं पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।

१५ अक्टूबर तक रोक
एनजीटी द्वारा प्रदेश सरकार के नए रेत नियमों के तहत १० जून से १५ अक्टूबर तक खनन करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस मामले में ठेका लेने वाली कंपनियों को पर्यावरण की अनुमति का प्रमाण पत्र अब एक्सपायरी हो गया है। खनन पर प्रतिबंध एनजीटी द्वारा पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया।

इन रेत घाटों में बेखौफ उत्खनन
पारागांव, कागदेही, हरदीडीह, कुरुद, कुटेला, बडग़ांव रेत घाट खुलेआम खनन का काम चल रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि अवैध खनन खुलेआम रात में जारी है। माइनिंग चौकियों पर भी इन्हें रोका नहीं जाता है।

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