कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर राज्यपाल ने कहा-जरूरतमंदों की मदद करके अत्यंत सुकून मिलता है

कार्यक्रम को विधिक सलाहकार आर.के. अग्रवाल, उप सचिव दीपक कुमार अग्रवाल एवं राज्यपाल के परिसहाय द्वय मेजर सिद्धार्थ सिंह, सूरज सिंह परिहार ने भी संबोधित किया। परिसहाय परिहार ने इस अवसर पर राज्यपाल के स्नेह को रेखांकित करती स्वरचित कविता भी पढ़ी। राजभवन परिवार की ओर से राज्यपाल उइके को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। अंत में नियंत्रक हरवंश मिरी ने छत्तीसगढ़ी में धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर राजभवन के समस्त अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित थे।

By: Shiv Singh

Published: 29 Jul 2021, 05:58 PM IST

रायपुर. राज्यपाल अनुसुईया उइके के 29 जुलाई को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बतौर दो साल पूर्ण होने के अवसर पर आज राजभवन परिवार ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल उइके ने इस अवसर पर कहा कि वे सौभाग्यशाली है कि उन्हें छत्तीसगढ़ का राज्यपाल बनने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि मैंने पूरे भारत का भ्रमण किया है और यह महसूस किया कि छत्तीसगढ़ के लोग जैसे अत्यंत सहज और सरल लोग कहीं नहीं हैं। इन दो वर्षों के कार्यकाल को उन्होंने संतुष्टि भरा बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के दूरदराज इलाकों में भी यह संदेश गया है कि राजभवन के दरवाजे आम जनता के लिए भी खुले हैं। यहां आने वाले लोगों को न्याय की आस रहती है और मैं उन्हें हर संभव मदद करने का प्रयास करती हूं। उनकी सहायता करके मुझे अत्यधिक सुकून मिलता है।

राज्यपाल उइके ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता की बेहतरी के लिए शासन-प्रशासन के साथ समन्वय से कार्य करने को प्राथमिकता देती हूं, जिससे छत्तीसगढ़ विकास के पथ पर हमेशा अग्रणी रहे। उइके ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से वार्तालाप से हो, यह उनकी कोशिश रहेगी। साथ ही आदिवासियों को उनका हक दिलाने के लिए के लिए भी प्रयास करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि न्याय से वंचित लोगों को न्याय दिलाना मेरा मकसद है। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 का दौर, देश-प्रदेश सहित पूरी दुनिया के लिए भयावह रहा, लेकिन सभी ने हिम्मत के साथ और आपसी समन्वय से इसका मुकाबला किया और आगे भी इसी तरह मिलजुलकर कोरोना से लडऩे के उपाय करेंगे।
राज्यपाल की संवेदनशीलता के चर्चे आदिवासी क्षेत्रों में भी
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव अमृत कुमार खलखो ने कहा कि राज्यपाल की संवेदनशीलता के चर्चे सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में भी होते हैं। सभी को यह महसूस होने लगा है कि आम आदमी की पहुंच राजभवन तक हो गई है और वे इसी विश्वास के साथ राजभवन के दरवाजे आते हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गौरव की बात है कि छत्तीसगढ़ को ऐसी संवेदनशील राज्यपाल मिली हैं। उनके मार्गदर्शन में काम करना पूरे राजभवन स्टाफ के लिए फख्र का विषय है।

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Shiv Singh Desk
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