कमिश्नर के आदेश पर तहसीलदार ने रंगमंच पर चलवाई जेसीबी

7 साल की लंबी लड़ाई के बाद भिखू को मिला न्याय

By: dharmendra ghidode

Published: 02 Sep 2021, 05:33 PM IST

गरियाबंद/फिंगेश्वर (ग्रामीण). भारतीय न्याय प्रणाली में देर ही सही लेकिन न्याय जरूरत मिलता है। इसके लिए दृढ़ निश्चय के साथ अडिग होकर सत्य और न्याय के लिए लड़ें तो सफलता जरूर मिलती है। कुछ ऐसा ही ग्राम पंचायत भैंसातरा के भिखु राम साहू का है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद भी 7 सालों से अनेक दफ्तरों के चक्कर काटते रहे। लेकिन एक लंबी लड़ाई के बाद अंतत उन्हें न्याय मिला और कमिश्नर ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए रंगमंच को तोडऩे का आदेश दिया।
कमिश्नर के आदेश के परिपालन में बुधवार को राजिम नायब तहसीलदार अंकुर रात्रे, जनपद पंचायत फिंगेश्वर के अधिकारी सहित पुलिस टीम की मौजूदगी में रंगमंच को जेसीबी से तोड़ा गया। भिखू राम साहू लंबे समय से अपने घर से लगे रंगमंच को तोडऩे न्यायालय में प्रकरण दायर किया था। इस पूरे मामले में दिलचस्प बात ये है कि भिखु राम साहू ने अपने घर के पास स्थित रंगमंच को तोडऩे के एवज में खुद की राशि से ग्राम के ही स्कूल में 2 लाख की लागत से रंगमंच बनाकर दिया था। आज न्याय मिलने से भीखू राम साहू गदगद था और कहा कि मुझे देश के संविधान और कानून में पूर्ण भरोसा है।
इसलिए दिया था आवेदन
बता दें कि ग्राम पंचायत भैंसातरा के गरीब किसान भिखु राम साहू व उनके परिवार ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम दिए आवेदन में बताया था कि भैंसातरा में उसके घर से लगी भूमि पर पंचायत द्वारा रंगमंच का निर्मित है। रंगमंच पर शरारती तत्वों द्वारा रात भर शराब पीकर शोर-शराबा करते है। जुआ खेलते हैं, गाली-गलौज करते है। जिससे उन्हें व उनके परिवार परेशान है।
भीखू ने खुद के खर्च से बनवा दिया रंगमंच
बताना लाजमी है कि गरियाबंद जिले में पहला ऐसा मामला है, जहां किसी व्यक्ति ने खुद की राशि से रंगमंच बनाकर दिया हो। भैंसातरा के भिखु राम अपने घर के सामने बने रंगमंच को हटाने ग्राम पंचायत से आग्रह किया कि उक्त रंगमंच को हटाया जाए। उसके बदले वे खुद के व्यव से दूसरी जगह रंगमंच बना देंगे और उन्होंने स्कूल परिसर में रंगमंच बनाकर दे दिया। जिसमें 2 लाख से अधिक राशि खर्च कर रंगमंच का निर्माण भिखू राम साहू द्वारा किया गया।
मामला ग्राम भैंसातरा का
मामला गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर ब्लाक के ग्राम पंचायत भैसातरा का है। जहां पंचायत द्वारा लगातार पीडि़त की फरियाद अनसुनी की जा रही थी। सरपंच-सचिव की मनमानी का दंश झेल रहे पीडि़त युवक 7 साल से न्यायालय के चक्कर काट रहा था। दो-दो बार आवेदन खारिज होने के बाद भी अपीलार्थी ने हिम्मत नहीं हारी। अंतत: अपीलार्थी भीखुराम साहू और उसके अधिवक्ता महेंद्र सिंह ठाकुर के तर्क सुनने व उतरवादी के पक्ष सुनने के बाद कमिश्नर ने अपना फैसला सुनाते हुए तहसीलदार व जनपद पंचायत फिंगेश्वर को लिखित में निर्देशित किया कि रंगमंच को हटाकर न्यायालय को सूचित करें। जहां आज अधिकारियों ने रंगमंच पर जेसीबी चलकर तोड़ा गया। जहां ग्राम पंचायत भैंसतरा के ग्रामीण भी मौजूद थे।

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