आईएएस की नौकरी छोड़ BJP में शामिल होते ही, लगे ये गंभीर आरोप

आईएएस की नौकरी छोड़ BJP में शामिल होते ही, लगे ये गंभीर आरोप

Chandu Nirmalkar | Publish: Sep, 06 2018 02:01:48 PM (IST) | Updated: Sep, 06 2018 02:04:27 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

आप का दावा- जमीन घोटाले में फंसे ओपी को भाजपा का संरक्षण

रायपुर. आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि रायपुर के पूर्व कलक्टर ओपी चौधरी को जमीन घोटाले की आंच से बचाने के लिए भाजपा ने संरक्षण दिया है। आप के प्रदेश प्रभारी और दिल्ली के श्रम मंत्री गोपाल राय ने बुधवार को एक पत्रकारवार्ता में कहा, दंतेवाड़ा के तत्कालीन कलेक्टर ओपी चौधरी के संरक्षण में सरकारी और निजी जमीन की अदला-बदली का यह खेल 2011 से 2013 के बीच हुआ। सरकारी खजाने को भारी क्षति पहुंचाई गई। 

मामला जब कोर्ट पहुंचा तो हाईकोर्ट ने सितंबर 2016 में राज्य सरकार को मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया। इस मामले में तत्कालीन कलक्टर, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक एवं अन्य अधिकारियों पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। लेकिन सरकार ने यह जांच कभी नहीं कराई। गोपाल राय ने कहा, यही ओपी चौधरी अब नौकरी से इस्तीफा देकर भाजपा के लाडले नेता बन गए हैं।
राय का कहना था, इस पूरे प्रकरण में ओपी चौधरी को बचाने के लिए ही उन्हें भाजपा में प्रवेश करा स्टार नेता बनाने की कवायद की जा रही है। गोपाल राय ने पूछा, उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायधीश दीपक गुप्ता एवं जस्टिस पी सैम कोशी ने 15 सितम्बर 2016 को जो आदेश पारित किया है उसको सरकार ने 2 वर्षों तक क्यों दबा कर रखा।
जब उच्च न्यायालय ने जांच का आदेश किया है तो जांच क्यों नहीं की? अगर कोई जांच की है तो उसके पहले संबंधित अधिकारियों को निलंबित क्यों नही किया गया। आप के प्रदेश संयोजक डॉ. संकेत ठाकुर ने कहा, वे इस मामले में लोक आयोग में शिकायत करेंंगे। वहीं बिलासपुर उच्च न्यायालय में भी सरकार के खिलाफ अवमानना की याचिका लगाई जानी है। इस आरोप पर भाजपा नेता ओपी चौधरी का पक्ष लेने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं
हो पाया।

 

दावे के मुताबिक ऐसे हुआ घोटाला

गोपाल राय ने बताया, वर्ष 2010 में एक किसान बैजनाथ से 4 लोगों ने मिलकर 3.67 एकड़ कृषि भूमि की खरीदी। वर्ष 2011 में इन चारों ने कलक्टर ओपी चौधरी से उनकी निजी भूमि को जिला पंचायत परिसर में शामिल करने का प्रस्ताव दिया। मार्च 2013 में राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार, पटवारी और एसडीएम ने मिलकर सिर्फ 15 दिन के भीतर ही इन चारों की निजी जमीन के बदले में सरकारी भूमि देने की प्रक्रिया पूरी कर डाली। एक दिन के भीतर जमीन बेचने की परमिशन और नामांतरण संबंधी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। जिस जमीन को बैजनाथ से 10 लाख रुपए में खरीदा था उसे यह लोग 25 लाख रुपए में बेचने में सफल हो गए। उसके बदले में दंतेवाड़ा के बस स्टैंड के पास व्यावसायिक भूमि के साथ 2 अन्य स्थानों पर 5.67 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक पाने में भी सफल रहे।

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