धान खरीदी: रकबा घटाया, सूखत के नाम पर ज्यादा धान, खरीदी भी आधी हो गई


- प्रदेश भर के खरीदी केंद्रों पर किसान परेशान
- जगह-जगह आंदोलन की तैयारी में संगठन

By: Mithilesh Mishra

Published: 08 Dec 2019, 01:12 PM IST

रायपुर. प्रदेश भर के धान खरीदी केंद्रों पर हाहाकार की स्थिति निर्मित हो रही है। पहले तो सत्यापन के नाम पर पंजीयन के समय दर्ज किसानों के धान का रकबा कम किया गया। सूखत के नाम पर किसानों ने प्रति क्विंटल ढाई से तीन किलो धान अतिरिक्त लिया जा रहा है, अभी दो दिनों से खरीदी केंद्रों में धान खरीदी की दैनिक सीमा 35 से 50 प्रतिशत तक कम कर दी गई है।

कबीरधाम जिले के राजानवागांव के किसान सुखचंद ने छह एकड़ का पंजीयन कराया था। अब उसे शून्य कर दिया गया है। उसी गांव के फागू और दुखीराम के धान का रकबा भी शून्य हो चुका है। मतलब ये तीनों किसान अब धान नहीं बेच पाएंगे, क्योंकि सरकारी रेकॉर्ड में उन्होंने धान बोया ही नहीं है। चिखली गांव के धुरुआराम धुर्वे का 8 एकड़ अब 0.03 एकड़ में बदल चुका है। वहीं राजानवागांव के पवन पटेल का 5.5 एकड़ घटकर 2 एकड़ रह गया है।

रायपुर और गरियाबंद जिले के खरीदी केंद्रों से नई समस्या सामने आई है। गरियाबंद के बेलटुकरी समिति में रोजाना 4300 बोरी धान की तौल हो जाती थी। दो दिन से वहां केवल 2200 बोरी धान ही लिया जा रहा है। अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के राज्य सचिव तेजराम विद्रोही बताते हैं कि समितियों ने जनवरी तक का टोकन दे रखा है। लेकिन अब 100 बोरी लेकर गए किसानों को 35 बोरी धान वापस लाना पड़ रहा है। जहां विरोध हो रहा है वहां पंचनामा बनाकर केंद्र पर धान की बोरियां अलग रखी जा रही हैं। दुर्ग में समितियों ने प्रतिदिन 3 हजार क्विंटल लेने की लिमिट तय की है।

सूखत के नाम पर किसानों से अतिरिक्त धान लेने का खेल भी बदस्तूर जारी है। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के राजकुमार गुप्त बताते हैं कि प्रति क्विंटल ढाई से तीन किलोग्राम अतिरिक्त धान लिया जा रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ किसान सभा ने 5 से 10 किलोग्राम प्रति क्विंटल लिए जाने का आरोप लगाया। यह तब है, जब सूखत की भरपाई के लिए सरकार अलग से रकम देती है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा, खरीदी केंद्रों में किसानों से ही धान तुलवाने, बोरों में भरवाने और थप्पी लगवाने का काम कराया जा रहा है। इस काम के लिए सरकार ने मजदूरी मद में 10 रुपए प्रति क्विंटल अलग से देने का प्रावधान कर रखा है। दोनों नेताओं का आकलन है कि सरकारी खरीदी केंद्रों में ही किसानों से प्रति क्विंटल 150 रुपयों की लूट हो रही है। सरकार अगर 85 लाख मीट्रिक टन धान खरीदती है तो यह रकम 1275 करोड़ रुपयों की होगी।

किसानों में बढ़ रहा है आक्रोश, आंदोलन भी शुरू
सरकार के ऐसे फैसलों की वजह से किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कई जिलों में आंदोलन भी शुरू हो चुके हैं। कबीरधाम में सहकारी समिति अध्यक्षों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने सोमवार को खरीदी बंद कराने की घोषणा की है। वहीं कई जगहों पर चक्काजाम की तैयारी है। रविवार को फिंगेश्वर में किसानों की एक बैठक होगी। वहीं प्रगतिशील किसान संगठन ने इन मुददों पर हस्तक्षेप के लिए राज्यपाल से मुलाकात का समय मांगा है।

Mithilesh Mishra Desk
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