जैन धर्म का सबसे बड़ा पर्व पर्युषण महापर्व आज से

जैन धर्म का सबसे बड़ा पर्व पर्युषण महापर्व 10 सितंबर से 19 सितंबर तक धूमधाम से मनाया जाएगा। पूरे विश्व में जैन समुदाय इस पर्व को बहुत ही आनंद व भक्ति के साथ मनाते हैं।

By: dharmendra ghidode

Published: 10 Sep 2021, 05:58 PM IST

भाटापारा. जैन धर्म का सबसे बड़ा पर्व पर्युषण महापर्व 10 सितंबर से 19 सितंबर तक धूमधाम से मनाया जाएगा। पूरे विश्व में जैन समुदाय इस पर्व को बहुत ही आनंद व भक्ति के साथ मनाते हैं।
श्री 1008 आदिनाथ नवग्रह पंच बाल्याती दिगंबर जैन मंदिर भाटापारा में पर्युषण पर्व है की पूर्ण तैयारी हो चुकी है। गुरुवार को रोठ तीज के पावन दिवस पर मंदिर की मूल बेदी में भगवान के पीछे भामंडल वं भगवान के ऊपर छत्र व अष्ट प्रातिहार विराजमान सुमन लता, नेहा मोदी,रजनी मोदी, अभिनव मोदी, सुरभि मोदी, अभिषेक मोदी द्वारा किया गया। मंदिर की में प्रतिदिन प्रात: 7 बजे मंगलाष्टक 7.30 बजे भगवान का मंगल अभिषेक, 7.45 बजे शांति धार,ा 8.15 पर मंगल आरती मंगल आरती के बाद श्री जी की प्रतिमा को मस्तक पर विराजमान कर भगवान की विधि के तीन परिक्रमा लगा कर भक्ति के साथ नृत्य के साथ विराजमान किया जाएगा। सुबह 9 बजे से संगीत में पूजन अभिषेकजी के सानिध्य में धूमधाम से की जाएगी। उसके बाद शांति पाठ कर आज का पूजन का विसर्जन किया जाएगा। रात्रि 7 बजे श्री जी की मंगल आरती व सुमन लता मोदी द्वारा मां जिनवाणी का वाचन किया जाएगा। उक्त जानकारी मंदिर कमेटी के संरक्षक प्रकाश मोदी, नवीन गादिया व मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अभिषेक मोदी ने दी।

पर्वाधिराज पर्व पर्युषण का अंतिम दिवस आज सांव्तसरिक क्षमापना के रूप में मनेगा
नयापारा-राजिम. विगत आठ दिनों से पर्वाधिराज पर्व पर्युषण की आराधना जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ द्वारा स्वाध्यायी भारती सिंगी (बालाघाट) व ललिता पारख (राजिम) की सानिध्यता में धूमधाम से की जा रही है। कल्प सूत्र की वांचना के अंतर्गत स्वाध्यायी भारती सिंगी ने भगवान महावीर, नेमिनाथ, पाश्र्वनाथ व आदिनाथ भगवान के जीवनचरित्र का वाचन किया। शुक्रवार को पर्व का अंतिम दिवस सांव्तसरिक क्षमापना के रूप में मनेगा। इस दिन श्वेताम्बर जैन श्रीसंघ के सदस्य आज पौषध व्रत ( एक दिन का साधु जीवन) लेकर उपवास कर दिन भर मंदिर में साधना आराधना करेंगे। संघ के छोटे बड़े सभी सदस्य यह व्रत करेंगे । प्रात: प्रतिक्रमण के साथ पौषध व्रत होगा। प्रात: 9 बजे कल्प सूत्र की वोचना, दोपहर चैत्य परिपाटी के अंतर्गत जिनमंदिर के दर्शन वंदन का कार्य सकल श्रीसंघ करेगा। संध्या 4 बजे मंदिर में सांवत्सरिक प्रतिक्रमण होगा।

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