बड़ा खतरा: नॉन-कोविड 19 अस्पतालों में भर्ती मरीज निकल रहे संक्रमित, महिलाएं और बुजुर्ग बरतें सावधानी

- 31 मई को 'पत्रिका' ने बताया था अस्पतालों में बढ़ रहा है खतरा...-
- अस्पताल जाना जरूरी हो तो ही जाएं

By: Bhupesh Tripathi

Published: 02 Jun 2020, 08:21 AM IST

रायपुर. प्रदेश के अस्पतालों में कोरोना वायरस का खतरा एकाएक बढ़ गया है। कैसा बढ़ा इसे लेकर कई वजहें हैं। जैसे- आम मरीजों का अस्पताल जाना जो कहीं न कहीं बाजार, दफ्तर या अन्य ऐसी जगहों पर गए हों जहां संक्रमण रहा हो। या संक्रमित मरीजों का अस्पताल में दाखिल होना, जिन्हें पता ही नहीं हो कि वे संक्रमित हैं। या फिर अस्पताल में रहते हुए ही मरीजों का संक्रमित होना। चाहे हो, मगर अब अस्पताल में वायरस घर कर रहा है। इसलिए जरूरी है कि अस्पताल जाएं तो अपनी पूरी सावधानी से।

सोमवार को राजधानी रायपुर के अस्पतालों में भर्ती तीन मरीज कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। जिनमें एम्स में भर्ती कैंसर का मरीज, जो बीते हफ्तेभर से एम्स के सर्जरी विभाग में था। दूसरा, जगदलपुर की १९ वर्षीय युवती जो निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है। उसे भी सर्दी, जुखाम और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत थी। तीसरा, ७३ वर्षीय बुजुर्ग। मगर, सवाल यह नहीं है कि ये संक्रमित हैं, सवाल यह है कि ये संक्रमित कैसे हुए? अभी तक इनकी कोई हिस्ट्री सामने नहीं आई है। राज्य और जिला की कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम हिस्ट्री खंगालने में जुटी हुई हैं। उधर, दूसरी तरफ सभी अस्पताल प्रबंधन घबराए हुए हैं। भले ही ये कह रहे हों कि पूरी सावधानी से इलाज कर रहे थे, मगर क्या इन्हें आईसोलेट करके ईलाज किया जा रहा था? क्या सभी स्टॉफ पीपीई किट, मॉस्क, फेस शील्ड पहने हुए थे? अब इसे लेकर राज्य स्वास्थ्य विभाग भी चिंतित है। क्योंकि भविष्य के खतरे को देखते हुए प्रदेश के हर एक सरकारी और निजी अस्पताल को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

पूरा अस्पताल नहीं होगा सील :
निजी अस्पताल में कोरोना मरीज मिलने से पूरा अस्पताल सील नहीं किया जाएगा। पूर्व में कोरबा का अस्पताल सील करने के बाद निजी अस्पतालों ने विरोध किया था। इसके बाद गाइड-लाइन बदली गई है। अब अस्पताल का वही भाग सेनिटाइज किया जाएगा, जहां पर मरीज भर्ती था। उसे देखने वाले डॉक्टर-नर्स और स्टाफ को क्वारंटाइन किया जाएगा।

निजी अस्पताल की तरफ से कहा गया कोई खतरा नहीं है :
श्रीनारायणा अस्पताल के मैनेजिंग डॉयरेक्टर डॉ. सुनील खेमका ने जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना पॉजिटिव मरीज मिला है,स्व. अजीत जोगी के बगल वाले आईसीयू में नहीं बल्कि चौथी मंजिल में बने वार्ड में भर्ती था। स्व. जोगी को देखने आने वालों से इसका कोई संपर्क नहीं हुआ है। इसलिए कोई चिंता न करें।

स्वास्थ्य विभाग की अपील :

- गंभीर बीमारी हो तो ही अस्पताल जाएं। वरना अपने कंस्लटेंट डॉक्टर से फोन पर ही चिकित्सकीय परामर्श लें।
- १५ साल से कम के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और ६० साल से अधिक के बुजुर्ग को घर पर रखा जाए। इन्हें बाजार न जानें, क्योंकि ये सर्वाधिक संवेदनशील केटेगरी में हैं।

- बाहरी व्यक्ति के संपर्क में न जाएं। दूरी बनाए रखें।
- अस्पताल जाएं तो मॉस्क लगाकर जाएं। कोशिश करें की ग्लब्स पहनें। सेनिटाइजर साथ रखें। हर घंटे में हाथ साबून से साफ पानी से धोते रहें।

अस्पतालों में स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है। मगर, मुश्किल इस बात की है कि अधिकांश मरीजों में लक्षण ही दिखाई नहीं देते हैं। कर भी क्या कर सकते हैं। परिस्थितियां काफी चिंताजनक हो रही है। आखिर कब तक सरकार, डॉक्टर और मीडिया समझाती रहेगी। आम लोगों को समझना होगा।
डॉ. महेश सिन्हा, अध्यक्ष, आईएमए

Bhupesh Tripathi
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