पितृपक्ष आज से: पुरोहित कराएंगे सिर्फ तर्पण-पिंडदान, नहीं करेंगे भोज, यजमान से लेंगे राशन सामग्री

पितरों के श्रद्धाभाव प्रकट करने का पक्ष बुधवार से प्रारंभ होने जा रहा है। इन पंद्रह दिनों में हर दिन तिथि वार लोग अपने पितरों का तर्पण-पिंडदान और श्राद्ध करेंगे

By: Bhawna Chaudhary

Published: 02 Sep 2020, 09:33 AM IST

रायपुर. पितरों के श्रद्धाभाव प्रकट करने का पक्ष बुधवार से प्रारंभ होने जा रहा है। इन पंद्रह दिनों में हर दिन तिथि वार लोग अपने पितरों का तर्पण-पिंडदान और श्राद्ध करेंगे। पहली दिन की शरद पूर्णिमा तिथि की है। इस कोरोना काल में घरों, नदी और तालाबों के घाट पर लोग तर्पण तो कर सकेंगे, लेकिन पितरों को गयाजी पहुंचाना आसान नहीं होगा। खासकर उन परिवारों के लिए जिनकी आर्थिक स्थिति सामान्य है। क्योंकि दुर्ग से छपरा के बीच चलने वाली सारनाथ एक्सप्रेस के पहिए जाम पड़े हैं। यही ट्रेन गया के लिए मुख्य साधन हुआ करती थी। इसलिए गयाजी वे परिवार ही जा सकेंगे जिनके पास या तो स्वयं के वाहन हैं या फिर किराया की गाड़ी करने में सक्षम है।

कोरोना का असर जन-जीवन पर पड़ने के साथ ही तीज-त्योहार का उत्सव काफी प्रभावित हुआ है। इसका असर पितृपक्ष पर भी पड़ रहा है। पुरोहित अपने यजमानों के यहां तर्पण और पिंडदान क्रिया तो कराएंगे, लेकिन श्राद्ध भोजन की जगह एक दिन के भोजन का राशन सामग्री और दक्षिणा ही ग्रहण करेंगे। ऐसा पुरोहित यजमानों को अवगत भी करा रहे हैं।

महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ला, पुरोहित राजेश तिवारी का कहना है कि कोरोनाकाल के कारण यजमानी काफी प्रभावित हुई है। पितृपक्ष में हर दिन तीन से चार यजमानों के यहां से तर्पण और पिंडदान कराने का न्योता मिला हुआ है। लेकिन सावधानी बरतते हुए संपूर्ण क्रिया संपन्न कराएंगे। पुरोहितों को कई जगह श्राद्ध क्रिया कराने जाना होता है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए यजमानों से उनके पितरों के नाम पर राशन सामग्री और दक्षिणा प्राप्त करने की भावना से अवगत करा दिए हैं।

घर में ऐसे करें तर्पण
स्नान आदि करके तर्पण की सामग्री इकट्ठा कर आसन लगाकर बैठ जाएं। एक बाल्टी में लगभग 4 से 5 लोटा जल रखें और थोड़ा थोड़ा जौ, तिल, चावल, सफेद फू ल, सफेद चंदन, गंगाजल आदि मिलाकर परात में पितरों के नाम से तर्पण करें। हाथ में कुशा, जौ, तिल, चावल लेकर संकल्प करें। पूर्व दिशा की तरफमुंह करके बाएं हाथ से तांबे के लोटे में बाल्टी का जल लेकर कुशा पकड़ें, दाहिने हाथ की अंगुलियों के अग्र भाग से देवताओं को तर्पण करें। फिर उत्तर दिशा की ओर मुंह करके ऋषियों के लिए कनिष्ठा उंगली (छोटी उंगली) के मूल तरफजल गिराते हुए तर्पण करें। इसके बाद दक्षिण की ओर मुंह करके अंगूठा की तरफ जल गिराते हुए अपने पितरों के नाम से तर्पण करें।

गाय, कुत्ता और कौवा का विशेष महत्व
पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार गरुण पुराण में वर्णन है कि पितरों के नाम पर श्राद्ध भोजन से पहले गाय, कुत्ता और कौवा को खिलाने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है। यजमान जलाशयों व घरों में तर्पण करके श्राद्ध भोजन का हिस्सा जीव-जंतुओं को कराएं, उसका उन्हें फल प्राप्त होगा।

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