सावधान! छत्तीसगढ़ की हवा में घुला जहर, फैला रहा है बीमारियां

इन दिनों जहरीले धुएं से फैली घबराहट के बीच बीमारियों के बोझ पर हुए पहले राज्यवार वैज्ञानिक अध्ययन में यह बात सामने आई है

By: चंदू निर्मलकर

Published: 14 Nov 2017, 12:04 PM IST

मुकेश केजरीवाल@नई दिल्ली. देश में कुल बीमारियों में 11 फीसदी की वजह सिर्फ वायु प्रदूषण है। इंसानी जीवन के कीमती वर्ष बर्बाद करने में इसे दूसरा सबसे बड़ा कारण पाया गया है। प्रदूषण की मार के लिहाज से राजस्थान की हालत देश में सबसे भयावह है। इन दिनों जहरीले धुएं से फैली घबराहट के बीच बीमारियों के बोझ पर हुए पहले राज्यवार वैज्ञानिक अध्ययन में यह बात सामने आई है। केंद्र सरकार की ओर से दो साल के प्रयास से तैयार अध्ययन में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के कुपोषण सबसे ऊपर पाया गया है।

यह 15 फीसदी बीमारियों की अकेली वजह है। लेकिन कुपोषण के अधिकांश पैमानों में 1990 से 2016 के दौरान काफी कमी आई है। घर से बाहर वायु प्रदूषण में इस दौरान 17 प्रतिशत वृद्धि हुई है। पिछड़े राज्यों पर इसका असर ज्यादा है।

सावधान...
केंद्र सरकार ने कुछ गैर सरकारी संगठनों के साथ मिल कर Óहेल्थ ऑफ द नेशन्स स्टेट्सÓ रिपोर्ट तैयार की है। इसमें पाया गया है कि भारत उन देशों में है, जहां लोगों को वायु प्रदूषण का खतरा सबसे ज्यादा है। तीसरे नंबर पर खान-पान संबंधी खतरे हैं। हाई ब्लड प्रेशर और शुगर को भी शीर्ष पांच खतरों में रखा गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट : देश के शीर्ष संस्थान भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दो गैर सरकारी संगठनों के साथ मिल कर दो साल के प्रयास के बाद इसे तैयार किया है। अब तक अलग-अलग बीमारियों के बोझ का अध्ययन होता रहा है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर सभी राज्यों और सभी प्रमुख बीमारियों को शामिल करने वाला यह पहला ऐसा अध्ययन है। केंद्र सरकार के साथ ही राज्यों को भी अपनी योजना और नीति तय करने में यह मददगार होगा।

भारत में शीर्ष पांच जानलेवा बीमारियां : 1. हृदय रोग$ 2.फेफड़े संबंधी रोग (सीओपीडी), 3. डायरिया, 4.लकवा, 5. श्वसन संबंधी संक्रमण।


'हेल्थ ऑफ द नेशन्स स्टेट्सÓ रिपोर्ट आज आएगी
घरेलू वायु प्रदूषण में आ रही है कमी, जबकि बाहरी वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी
घरेलू वायु प्रदूषण की वजह - घरेलू जलावन
बाहरी वायु प्रदूषण की वजह- बिजली उत्पादन, उद्योग, वाहन, निर्माण और कचरा जलाया जाना

सुप्रीम कोर्ट ने कहा-
प्रदूषण के चलते इमरजेंसी जैसे हालात
सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने और धूल से हो रहे प्रदूषण को लेकर केंद्र, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उप्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इसमें पराली न जलाने का निर्देश दिया गया है, साथ ही प्रदूषण कम करने के लिए सरकारों से सुझाव मांगे हैं। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच वायु प्रदूषण को लेकर वकील आरके कपूर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने कहा, प्रदूषण से इमरजेंसी जैसी स्थिति है, इससे निपटना तुरंत आवश्यक है।
प्रदूषण से होने वाली डैली* दर
राष्ट्रीय ३,४६९
राजस्थान ४,५२८
उत्तर प्रदेश ४,३९०
एमपी ३,८०९
छत्तीसगढ़ ३,६६७

*डैली : मानव जीवन के बर्बाद होने वाले वर्ष की प्रति लाख दर

चंदू निर्मलकर Desk
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