पूर्व सीएम के दामाद को पकड़ने पुलिस ने घर और अस्पताल पर मारा छापा, डीकेएस अस्पताल की फाइलें हुई जब्त

(डीकेएस) सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए गुरुवार को पुलिस ने उनके अस्पताल और घर में छापा मारा।

By: Deepak Sahu

Updated: 29 Mar 2019, 09:26 AM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद और दाऊ कल्याण सिंह (डीकेएस) सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए गुरुवार को पुलिस ने उनके अस्पताल और घर में छापा मारा। मौके पर डॉ. गुप्ता नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने विवेचना से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए। बताया जाता है कि दस्तावेज में डीकेएस की कई फाइलें हैं।

गौरतलब है कि पुलिस ने पुनीत गुप्ता को 27 मार्च को थाने में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा था। डॉ. गुप्ता थाने न पहुंचकर अपने वकील को भेजकर तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए 20 दिन का समय मांगा था। पुलिस ने उन्हें समय देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। गोलबाजार पुलिस की टीम गुरुवार दोपहर ३ बजे डॉ. गुप्ता की तलाश में राजेंद्र नगर स्थित जीबीजी किडनी अस्पताल पहुंची।

 

उन्होंने अस्पताल को बाहर से कुछ देर के लिए सील कर दिया। लेकिन, अस्पताल में डॉ. गुप्ता नहीं मिले। पुलिस को आशंका थी कि वे अस्पताल में मौजूद हैं। दरअसल, एक हिस्से में किडनी का अस्पताल है और ऊपर के हिस्से में डॉ. गुप्ता रहते हैं। छापे के दौरान पुलिस ने अस्पताल में मौजूद विभिन्न दस्तावेज की जांच और कर्मचारियों से पूछताछ की। जांच करीब 4 घंटे तक चली। अस्पताल के कर्मचारियों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि पिछले कुछ दिनों से डॉ. गुप्ता अस्पताल नहीं आ रहे हैं।

डीकेएस अस्पताल की फाइलें जब्त
पुलिस के मुताबिक, डीकेएस अस्पताल को छोड़ते समय डॉ. गुप्ता महत्वपूर्ण फाइलें अपने साथ ले गए थे। फाइलें और दस्तावेज चार-पांच बैग में रखी थी। एफआईआर होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान खरीदी-बिक्री, बैंक लोन व नियुक्तियों से संबंधित कई दस्तावेज नहीं मिले थे। जीबीजी में गुरुवार को पुलिस को छापे के दौरान कई फाइलें मिली। ये फाइलें डीकेएस से जुड़ी बताई जा रही है।

 

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यह है मामला
प्रदेश के पहले सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना और संचालन के लिए शासन की ओर से करोड़ों रुपए जारी हुए थे। उस दौरान डॉ. गुप्ता ही अधीक्षक थे। इस दौरान अस्पताल में भर्ती से लेकर खरीदी तक में कई अनियमितताएं सामने आई। राज्य शासन ने इसकी जांच के लिए जांच टीम का गठन किया था। टीम ने अस्पताल में पिछले तीन साल के भीतर ५० करोड़ रुपए का भष्ट्राचार होने का खुलासा किया।

इसके बाद पुलिस ने डॉ. गुप्ता और अन्य के खिलाफ अपराध दर्ज किया। अपराध दर्ज होने के बाद पुलिस अस्पताल के डॉक्टर, प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारियों से पूछताछ की और बयान लिए। पुलिस जांच के अलावा शासन ने दोबारा ऑडिट कराया। ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद से पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है।

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