बिजली दरों को लेकर बहस खत्म, विद्युत नियामक आयोग में हुए आमने-सामने

महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान के बाद अब तमिलनाडु ने मिनिमम डिमांड चार्ज में राहत प्रदान की है। अप्रैल महीने का बिल अभी जारी नहीं किया गया है। आमतौर पर उद्योगों के लिए बिजली बिलों की गणना महीने की पहली तारीख तक हो जाती है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 05 May 2020, 07:35 PM IST

रायपुर. बिजली दरों को लेकर उद्योगपतियों की याचिका पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग में 29 अप्रैल को बहस खत्म हो चुकी है, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (सीएसपीडीसीएल) और औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने अपनी दलीलें रखी। उद्योगपतियों ने जहां डिमांड-फिक्स्ड चार्ज में राहत की मांग पर दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए अन्य राज्यों के उदाहरण पेश किए हैं, वहीं फोर्स मेजर क्लॉज के अंतर्गत छूट की बात रखी है।

दूसरी तरफ सीएसपीडीसीएल के अधिकारियों ने डिमांड चार्ज में राहत या कमी के बाद वित्तीय भार आदि की मजबूरियां सामने रखी हैं। दोनों पक्षों में बहस के दौरान राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से यह उम्मीद जताई जा रही है कि उद्योगपतियों के हितों में निर्णय आएगा। अप्रैल महीने के बिजली बिलों में डिमांड चार्ज की राशि जुडऩे के बाद उद्योगपतियों ने नियामक आयोग में पिटीशन दाखिल किया था, जिसके बाद बहस के लिए दोनों पक्षों को सामने-सामने किया गया। उद्योगपतियों ने मांग रखी कि लॉकडाउन के दौरान जिस तरह देश के अन्य राज्यों में बिजली दरों को लेकर राहत प्रदान की है, उसी तरह छत्तीसगढ़ में भी उद्योगों को राहत मिलनी चाहिए।

महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान के बाद अब तमिलनाडु ने मिनिमम डिमांड चार्ज में राहत प्रदान की है। अप्रैल महीने का बिल अभी जारी नहीं किया गया है। आमतौर पर उद्योगों के लिए बिजली बिलों की गणना महीने की पहली तारीख तक हो जाती है। औद्योगिक संगठनों के विद्युत सलाहकार श्याम काबरा ने बताया कि वर्तमान में अप्रैल महीने का बिल अभी जारी नहीं किया गया है। नियामक आयोग में सुनवाई हो चुकी है। हमे उम्मीद है कि दलीलों के बाद उद्योगों के पक्ष में राहत भरा निर्णय आएगा।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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