गर्भवती को अस्पताल से कर दिया डिस्चार्ज, एक घंटे बाद घर में हो गई डिलीवरी

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एक नर्स की लापरवाही के चलते एक गर्भवती महिला और उसके बच्चे की जान पर बन आई थी।

By: dharmendra ghidode

Published: 03 Jan 2020, 05:29 PM IST

नवापारा-राजिम. नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एक नर्स की लापरवाही के चलते एक गर्भवती महिला और उसके बच्चे की जान पर बन आई थी। नर्स द्वारा गर्भवती महिला को अस्पताल से डिस्चार्ज करने के एक घंटे बाद ही घर में डिलीवरी हो गई। फिलहाल बच्चा-जच्चा स्वस्थ हंै। महिला के परिजनों ने नर्स के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
मिली जानकारी के अनुसार नगर के वार्ड 15 सोमवारी बाजार में रहने वाली सीमा निषाद पति लोकनाथ निषाद को बुधवार सुबह 11 बजे प्रसव पीड़ा हुई। इस पर उसके पति और परिजन उसे लेकर नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। केंद्र में मौजूद डॉ.गरिमा पाठक ने उसकी सोनोग्राफी करवाई और डिलीवरी नजदीक देख उसे तत्काल केंद्र में भर्ती करवाया। दोपहर 2 बजे डॉक्टर पाठक लंच करने चली गई। 4 बजे जब वह वापस आई तो सीमा केंद्र में नहीं थी। अचानक शाम 7 बजे सीमा के परिजन अपने परिचितों और नगर के कुछ प्रबुद्ध नागरिकों के साथ केंद्र पहुंचे और केंद्र की नर्स यशोदा देवांगन पर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग करने लगे।
सीमा के परिजनों का कहना था कि नर्स यशोदा ने उन्हें यह कहते हुए सीमा को वापस घर ले जाने कह दिया था कि अभी डिलीवरी में 10-15 दिन का समय लगेगा और अगर इसके बाद भी वे लोग सीमा को केंद्र में रखते हैं तो वह देखभाल नहीं करेगी। नर्स यशोदा देवांगन के रवैये को देखते हुए और उसकी संभावना को सही मान परिजन दोपहर 3 बजे सीमा को घर ले गए, लेकिन घर पहुंचने के 1 घंटे के भीतर उसकी घर पर डिलीवरी हो गई। इसके बाद जब सीमा के परिजन नर्स यशोदा के पास आकर उसे डिलीवरी होना बताएं तो घबराई नर्स ने उन्हें सीमा और बच्चे को केंद्र लाने और पैसे लेकर मामला रफा-दफा करने की गुजारिश की। लेकिन परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए। सीमा के परिजनों का कहना था कि अगर घर पर डिलीवरी के दौरान जच्चा-बच्चा के साथ कोई अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता? लगभग 2 घंटे तक बहस के बाद लोगों ने नर्स यशोदा के विरुद्ध कार्रवाई के लिए बीएमओ के नाम एक शिकायती आवेदन डॉक्टरों को सौंपा है।
सीमा की जेठानी मंगला निषाद ने बताया कि हम लोग सीमा को लेकर डिलीवरी के लिए केंद्र आए थे। यहां मौजूद डॉक्टर पाठक मैडम के कहने पर सोनोग्राफी करवाया, जिसे देखकर उन्होंने शाम तक डिलीवरी होने की बात कहते हुए सीमा को भर्ती किया था। दोपहर को जब वे लंच करने चली गई तो अस्पताल में मौजूद नर्स यशोदा देवांगन ने दुव्र्यवहार करते हुए कहा कि डिलीवरी होने में अभी 8 से 15 दिन का समय है। अभी यहां से चले जाओ अगर इसके बाद भी यहां रुकोगे तो मैं चेकअप वगैरह नहीं करूंगी। यशोदा के दुव्र्यवहार से नाराज होकर हम लोग सीमा को लेकर घर चले गए, जहां 1 घंटे बाद उसकी डिलीवरी हो गई। इस बात की जानकारी नर्स यशोदा को देने पर वह घबरा गई और बहाने बनाते हुए बोली कि बच्चा 1 सप्ताह पहले आ गया है, जिसके चलते वह कमजोर होगा। मां और बच्चे को केंद्र ले आओ मैं इलाज करूंगी। साथ ही कहा कि मुझसे पैसे ले लो, लेकिन बात आगे मत बढ़ाना।
डॉक्टर गरिमा पाठक ने बताया मैंने सीमा की हालत देखकर सोनोग्राफी कराने कहा था और उसके बाद उसे फोन करके बुलाते हुए एहतियात के तौर पर केंद्र में भर्ती भी किया था। मेरे लंच में जाने के बाद उसे नर्स द्वारा बिना मेरे व अन्य डॉक्टरों की जानकारी के डिस्चार्ज कर दिया गया, जो कि गलत है। सीमा के परिजनों ने लिखित शिकायत दी है, जिसे बीएमओ को भिजवा दिया गया है।

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