छत्तीसगढ़: राहत की जगह कर्ज का प्रस्ताव बढ़ाएगी ठेले-रेहड़ी वालों की मुसीबत, आर्थिक पैकेज में दिक्कतों की अनदेखी

छत्तीसगढ़ हॉकर्स फेडरेशन के अध्यक्ष गौतम बंद्योपाध्याय कहते हैं, इस सेक्टर के लिए केंद्र सरकार का आर्थिक पैकेज गलत समझ और आंकड़ों पर आधारित है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने राहत पैकेज के तौर पर कर्ज के लिए केवल 50 लाख लोगों का लक्ष्य रखा है। यह बेहद कम है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 16 May 2020, 10:18 PM IST

रायपुर. लंबी तालाबंदी से टूट चुके ठेला, रेहड़ी, पटरी व्यापार को केंद्र सरकार के आर्थिक पैकेज ने भ्रमित कर दिया है। उनको समझ में नहीं आ रहा है, 10 हजार रुपए तक का सस्ता कर्ज उनकी मदद कैसे कर पाएगा। बैंकों को वे कैसे बताएंगे कि वे ठेला लगाते हैं। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ का कहना है, नकद राहत पहुंचाने की जगह कर्ज का उपाय ऐसे छोटी पूंजी वाले कारोबारियों की मुसीबत को बढ़ाएगा।

छत्तीसगढ़ हॉकर्स फेडरेशन के अध्यक्ष गौतम बंद्योपाध्याय कहते हैं, इस सेक्टर के लिए केंद्र सरकार का आर्थिक पैकेज गलत समझ और आंकड़ों पर आधारित है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने राहत पैकेज के तौर पर कर्ज के लिए केवल 50 लाख लोगों का लक्ष्य रखा है। यह बेहद कम है। 2013 में आई राष्ट्रीय पथ विक्रेता नीति और बाद के पथ विक्रेता कानून के मुताबिक आबादी का 2.5 प्रतिशत हिस्सा रेहड़ी-पटरी और ठेला लगाने के व्यवसाय में है।

इस मान से 1 अरब 32 करोड़ की आबादी वाले देश में ऐसे कारोबारियों की संख्या 3 करोड़ 31 लाख से अधिक है। अकेले रायपुर शहर में ऐसे कारोबारियों की संख्या 35 हजार के करीब होगी। हॉकर्स फेडरेशन ने राज्य सरकार से एक टास्क फोर्स गठित करने की मांग की है, जो राहत के व्यावहारिक उपाय सुझा सके।

किसे मिलेगा सस्ता कर्ज ?

बैंकों को रेहड़ी-पटरी वालों को कर्ज देने के विस्तृत दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। विशेषज्ञों को अंदेशा है कि इस कर्ज के लिए अफरा-तफरी मचेगी और भ्रष्टाचार होगा। गौतम बंद्योपाध्याय सवाल उठाते हैं, बैंक किस आधार पर पात्र की पहचान करेंगे? राज्य सरकारों ने कानूनी प्रतिबद्धता के बावजूद हाकरों का सर्वे कर उन्हें पहचान पत्र तक नहीं दिया है।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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