शाकाहारी है तो ना खाएं चांदी की वर्क लगी मिठाई, डरावना है इसका सच 

चांदी की वर्क लगी मिठाई देखने में भले ही सुंदर दिखती हो लेकिन वो शाकाहारियों के लिए अभक्ष्य है।

By: अभिषेक जैन

Published: 17 Sep 2016, 05:41 PM IST

रायपुर/दिल्ली. आप मिठाई की दुकान पर जाते हो और बड़े ही शौक से कहते हैं कि ये चांदी की वर्क लगी मिठाई दे दीजिए। लेकिन आपको अंदाजा है कि आप क्या खरीद रहे हैं और जिसे आप शाकाहारी व खाने योग्य समझ रहे हैं वो किससे बनी है। यदि आप जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। दरअसल बाज़ारों में मिलने वाली वर्क लगी मिठाईयां मांसाहार ही है क्योंकि इनके ऊपर लगा चाँदी की वर्क भेड़ की खाल से बनया जाता है। 

वर्क की जब अच्छी तरह पड़ताल की गई तो जो सच सामने आया वह भयाभय था। हमारे साथ सरासर धोखा था क्योंकि वो चादी का वर्क बकरी की खाल और आंतो के बीच चांदी रखकर बनाया जाता है। जो कि पूरी तरह मांस खाने जैसा ही है। चांदी की वर्क लगी मिठाई देखने में भले ही सुंदर दिखती हो लेकिन वो शाकाहारियों के लिए अभक्ष्य है। यदि आप वर्क लगी मिठाई को खा रहे हैं तो आप मांसाहार कर रहे हैं. इसलिए सावधान रहे हैं और आज ही खाना छोड़ दें। हालांकि सरकार ने भी चांदी का वर्क बनाने में जानवर के अंश का इस्तेमाल नहीं करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है लेकिन फिर भी इसे धड़ल्ले से बनाया जा रहा है।

ऐसे बनाया जाता है चांदी का वर्क
चांदी का वर्क बूचडख़ानों से ली गई जानवरों की खालों और उनकी आंतो के बीच रखकर हथौड़ों से पीटकर तैयार किया जाता है। इसके आलावा विदेशी मशीनों से भी चांदी का वर्क तैयार होता है। इसमें एक स्पेशल पेपर और पॉलिस्टर कोटेड शीट के बीच चांदी को रखकर उसके वर्क का पत्ता तैयार होता है। इसमें जानवर के अंश का इस्तेमाल नहीं किया जाता, चूंकि ये मशीनें महंगी हैं और देश में गिनीचुनी कंपनियों के पास ही हैं। ऐसे में इनका चांदी का वर्क महंगा पड़ता है और कम भी। एक अनुमान के मुताबिक देश में 90 फीसदी चांदी का वर्क पुराने तरीके से जानवरों के अंश का इस्तेमाल करके बनता है, जबकि 10 फीसदी मशीनों से तैयार होता है।

अभिषेक जैन
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