लॉकडाउन के बाद शहर की सफाई व्यवस्था जस की तस, नहीं हो रही नियमित सफाई

हर महीने रायपुर नगर निगम का चार से पांच करोड़ रुपए सफाई पर खर्च हो रहा, इसके बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया है। ठेकेदारों की लापरवाही की वजह से महापौर स्वच्छता सेल और निदान 1100 में शिकायतों की संख्या बढ़ने लगी है।


 

By: Bhupesh Tripathi

Published: 02 Jul 2020, 07:38 PM IST

रायपुर। लॉकडाउन के दौरान शहर की साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह से चाक-चौबंद हो गई थी। हर दूसरे-तीसरे दिन में सड़कों और नालियों की सफाई के लिए सफाई कर्मी आ रहे थे, लेकिन जब से लॉकडाउन खुला है, तब से नगर निगम की सफाई व्यवस्था फिर से चरमरा गई है। यही कारण है कि महापौर स्वच्छता सेल और निदान 1100 में सफाई को लेकर शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। महापौर स्वच्छता सेल में हर दिन नालियों के बजबजाने और सड़कों की सफाई नहीं होने की 100 से अधिक शिकायतें विभिन्न वार्डों से आती है। इसी तरह निदान 1100 में भी 70 से 80 शिकायतें आ रही हैं।

एक महीने से नहीं हुई है नालियों की सफाई
शहर के कई वार्डों की नालियों की सफाई एक महीने से नहीं हुई है। वार्डवासी महापौर स्वच्छता सेल और निदान 1100 में फोन कर-करके परेशान हो चुके हैं, लेकिन निगम के स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों और स्वच्छता निरीक्षकों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। जबकि नगर निगम ने सभी जोनों के स्वास्थ्य अधिकारियों को चार पहिया वाहन वार्डों की सफाई व्यवस्था के निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराया है। इसके बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था बदहाल है। कुछ स्वास्थ्य अधिकारी तो ऐसे हैं, जो वार्ड में गाहे-बगाहे निरीक्षण के लिए पहुंचते हैं, लेकिन वाहन से नीचे उतरना तक मुनासिब नहीं समझते हैं।

जीरों फीसदी दर का डाला टेंडर
वार्डों की सफाई व्यवस्था का ठेका देने के लिए नगर निगम ने टेंडर जारी किया गया था। इसमें कुछ ठेकेदारों ने सिंडिकेट बनाकर जीरो फीसदी में टेंडर डाला था। जबकि निगम ने एमआईसी में निर्णय लिया गया था कि जीरों फीसदी दर पर निविदा भरने वालों को बिल्कुल भी ठेका नहीं देना है, लेकिन जोनों के अधिकारियों और नेताओं के चहेते ठेकेदारों जिन्होंने जीरो फीसदी दर पर निविदा डाली थी, उसे ठेका आबंटित कर दिया गया है। जो ठेकेदार वर्षों से वार्डों की सफाई का ठेका ले रहे हैं, जिन्होंने एक-दो फीसदी अधिक दर में निविदा भरे थे, उन लोगों को ठेका नहीं दिया गया। इसे लेकर पिछले दिनों पार्षदों में नाराजगी भी दिखी थी।

कर्मचारी पर्याप्त, फिर भी नहीं हो रही सफाई
नगर निगम में प्लेसमेंट और स्थायी सफाई कर्मचारियों को मिलाकर करीब 3 हजार से अधिक संख्या हैं। इसके अलावा महापौर स्वच्छता सेल के लिए अलग से गैंग चलती है। इस गैंग को सेल में आने वाली शिकायतों का निराकरण करने का जिम्मा सौंपा गया है, लेकिन गैंग आज तक शिकायतों का निराकरण करने वार्डों में नजर नहीं आई।

इस संबंध में जब महापौर एजाज ढेबर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था में लापरवाही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी जोनों के जोन कमिश्नरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को सख्त हिदायत दी जाएगी कि सफाई व्यवस्था में सुधार कर लें, वरना कार्रवाई के लिए तैयार रहें। शहर की सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाना पहली प्राथमिकता है।

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