फर्जी एटीएम कार्ड लेकर दोबारा गए शॉपिंग मॉल, पुलिस ने दबोचा

फर्जी एटीएम कार्ड लेकर दोबारा गए शॉपिंग मॉल, पुलिस ने दबोचा
raipur gang arrested

Chandu Nirmalkar | Updated: 20 Apr 2015, 10:56:00 AM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

डेबिड कार्ड का क्लोन तैयार करके देश के अलग-अलग शहरों में ठगी करने वाले गिरोह का क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ किया है।

रायपुर. डेबिड कार्ड का क्लोन तैयार करके देश के अलग-अलग शहरों में ठगी करने वाले गिरोह का क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ किया है। तीन आरोपियों में से एक पकड़ा गया है। दो अन्य फरार हैं। तीनों मुंबई की झोपड़पट्टी में रहते हैं, लेकिन 11 अप्रैल को फ्लाइट से रायपुर पहुंचे थे। इसके बाद शहर में रहकर ठगी करने का प्रयास करते रहे।

क्राइम ब्रांच ने रविवार को इसका खुलासा करते हुए बताया कि मुंबई के सतीश सांई उर्फ मंगलू ने अपना फर्जी नाम समीर डिमेलो रखा था। वह अपने साथी नितिन तुकाराम उर्फ राहुल डी सांवत और रहमान शेख के साथ रायपुर पहुंचा। उसके पास आधा दर्जन विभिन्न बैंकों के डेबिड कार्ड थे।

तीनों आरोपी मेग्नेटो मॉल के रिलायंस डिजीटल एक्सप्रेस शोरूम पहुंचे। इसके बाद एक महंगा आईफोन व अन्य इलेक्ट्रानिक्स सामान खरीदा और 60 हजार रुपए से अधिक का भुगतान डेबिड कार्ड के जरिए किया। कार्ड किसी दूसरे के नाम पर था। इसकी शिकायत के बाद तेलीबांधा पुलिस ने अपराध दर्ज किया। आरोपी दूसरे दिन सिटी सेंटर पहुंचे। वहां खरीदारी की कोशिश में लगे थे। इसी दौरान क्राइम ब्रांच को भनक लग गई। दो आरोपी भाग निकले। सतीश को पकड़ लिया गया। उसके पास फर्जी आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी मिला है।

मुख्य आरोपी रहमान

पूछताछ में सतीश ने रहमान को मुख्य आरोपी बताया है। रहमान ही उसे डेबिड कार्ड लाकर देता था। इसके बाद ठगी करने जाते हैं। आरोपी कार्ड से महंगे सामान खरीद कर उन्हें नकद बेच देते थे। इसके अलावा होटल, फ्लाइट का खर्च भी डेबिड कार्ड के जरिए उठाते थे। तीनों ने कई शहरों में इस तरह की वारदात को अंजाम दिया है।

एेसे बनता है  डेबिड कार्ड का क्लोन

डेबिड कार्ड का क्लोन बनाने का पूरा खेल स्वीपिंग मशीन से शुरू होता है। अधिकांश बड़े दुकान, शोरूम व अन्य स्थानों में डेबिड कार्ड से भुगतान होता है। इसके लिए स्वीपिंग मशीन लगी होती है। ठगी करने वाले स्वीपिंग मशीन में मैग्नेटिक फिल्म लगा देते हैं, जिससे डेबिड कार्ड स्वेप करते समय उसका पूरा डाटा मैग्नेटिक फिल्म में आ जाता है। इसके बाद फिल्म निकालकर पूरा डाटा कंप्यूटर में ले लेते हैं।

इसके बाद अलग कार्ड मशीन की सहायता से पूरा डाटा नए कार्ड में उतार लिया जाता है और फिर उसका उपयोग करते हैं। क्राइम ब्रांच टीआई संजय सिंह ने बताया कि मुख्य आरोपी की तलाश जा रही है। डेबिड कार्ड का क्लोन बनाने में उसी की भूमिका प्रमुख है। दूसरे शहरों से भी इस तरह के मामलों की जानकारी मांगी गई है।
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