रायपुर : सरकार पारिस्थितिकी को ध्यान में रखकर बनायी जाएंगी नरवा संरक्षण-संवर्धन की योजनाएं, द्विफसली पर जोर

बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक अभीजीत सिंह, संचालक पंचायत जितेन्द्र शुक्ला, अपर विकास आयुक्त अशोक चौबे तथा राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग समिति के सदस्य प्रो. निनाद बोधनकर सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अनेक अधिकारी मौजूद थे।

By: Shiv Singh

Updated: 03 Dec 2019, 09:34 PM IST

रायपुर. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार नरवा, गरवा, घुरवा व बारी के अंतर्गत नरवा के संरक्षण और संवर्धन के लिए विभिन्न जिलों द्वारा तैयार किए गए डीपीआर की विस्तृत समीक्षा की गयी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव सुब्रत साहू ने विशेषज्ञों के साथ नवीन विश्राम भवन में राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं की विभिन्न जिलों द्वारा तैयार किए गए डीपीआर की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नालों के संरक्षण-संवर्धन के लिए पारिस्थितिक तंत्र को ध्यान में रखकर डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नालों में किए जाने वाले कार्यों का दीर्घकालिक लाभ किसानों को मिलना चाहिए। नालों का उपचार इस तरह से करें कि एक फसल लेने वाले किसानों को दूसरी फसल के लिए भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके। बैठक में सभी जिलों के जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार प्रदीप शर्मा और अन्य विशेषत्रों ने भी नरवा संवर्धन के डीपीआर को देखकर सुझाव दिए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव सुब्रत साहू ने विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर नरवा संरक्षण-संवर्धन के लिए संशोधित डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नए डीपीआर में वर्षवार किए जाने वाले कार्यों और उनके अपेक्षित परिणामों को भी शामिल करें।
साहू ने सुपोषण अभियान में स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले पोषण से भरपूर मुनगा की फली, भाजी, शकरकंद, मशरूम और महुआ लड्डू को शामिल करने का सुझाव दिया।

Shiv Singh Desk
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