फर्जी डिग्रियों के खेल में शिक्षा सचिव

फर्जी डिग्रियों के खेल में शिक्षा सचिव

Chandu Nirmalkar | Publish: Apr, 21 2015 09:26:00 AM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

बाहरी डीम्ड विश्वविद्यालयों के प्रदेश में संचालन और उनकी अवैध डिग्री से छले जा रहे युवाओं के मामले को लोक आयोग ने गंभीरता से लिया है।

रायपुर. बाहरी डीम्ड विश्वविद्यालयों के प्रदेश में संचालन और उनकी अवैध डिग्री से छले जा रहे युवाओं के मामले को लोक आयोग ने गंभीरता से लिया है। लोकायुक्त शंभूनाथ श्रीवास्तव ने इस मामले में उच्च शिक्षा सचिव बीएल अग्रवाल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव से पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ कदाचार का मामला चलाया जाए, साथ ही उनकी सभी चल-अचल संपतियों का 14 मई तक ब्यौरा मांगा है।

बाहरी विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदेश में स्टडी सेंटर खोलकर डिग्री बांटने संबंधी शिकायतों पर सोमवार को लोक आयुक्त ने सुनवाई की। उन्होंने इस दौरान उच्च शिक्षा सचिव डॉ. बीएल अग्रवाल की भूमिका को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, प्रदेश में १८ से अधिक स्टडी सेंटर अपनी डिग्रियां बांटकर छात्रों के भविष्य को अंधकारमय बना रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने बाहरी विश्वविद्यालय को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर डिग्री देने के कार्य को अवैध माना है। ऐसे में यह कार्य प्रदेश की जनता के साथ छल है।

मिली थी शिकायत

पिछले साल शीला पटनायक नाम की महिला ने शिकायत की थी कि सीएमजे विश्वविद्यालय शिलांग से डिग्री दिलाने के नाम पर उनसे 67 हजार 200 रुपए लिए गए। मान्यता के अभाव में वह डिग्री अमान्य हो गई। आयोग ने इस मामले की जांच उच्च शिक्षा विभाग को सौंपी थी और एेसे विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई का निर्देश दिया था। रायपुर संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.एके शुक्ला ने मामले की जांच कर शिकायत को सही पाया। उच्च शिक्षा विभाग ने शिकायतकर्ता को एफआईआर कराने की सलाह दी, लेकिन खुद कोई कार्रवाई नहीं की।

ऐसे नजर आई संलिप्तता

लोकायुक्त ने कहा कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ के संबंध में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और अन्य कर्मचारियों को कई बार सूचित किया गया। यही नहीं डॉ. अग्रवाल को 9-10-2014 को इस मामले में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा गया। लेकिन अब तक वे उपस्थित नहीं हुए। पत्रावली में उपलब्ध अभिलेखों से स्पष्ट है कि इस मामले में उनकी संलिप्तता और कदाचार प्रथम दृष्टया प्रकट होता है। इस स्थिति में मुख्य सचिव को निर्देशित किया जाता है कि वे बताए कि क्यों न इस मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति की जाए और डॉ. अग्रवाल के खिलाफ कदाचार का मामला शुरू हो। मुख्य सचिव को जवाब मिलने के बाद इस मामले की सुनवाई 14 मई को होगी।

अग्रवाल का विवादों से पुराना नाता

इस मामले में आयोग के निशाने पर आए उच्च शिक्षा सचिव बीएल अग्रवाल पहले भी विवादों में रहे हैं। 2010 में
आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें निलंबित किया गया था। इस मामले में भी आयोग ने उन्हें अक्टूबर महीने में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होने को कहा गया। आयोग की किसी भी सुनवाई में अग्रवाल खुद नहीं पहुंचे।


इनकी डिग्री पर सवाल

कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी मैसूर (कर्नाटक), स्वामी विवेकानंद यूनिवर्सिटी सागर (मप्र), सीएमजे यूनिवर्सिटी शिलांग (मेघालय), द ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी वोखा (नगालैंड), लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी जालंधर, जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी, ईस्टर्न इंस्टीस्ट्यूट फॉर इंटीग्रेटेड लर्निंग इन मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी सिक्किम, विनायका मिशन सिक्किम यूनिवर्सिटी, सिक्किम मनिपाल यूनिवर्सिटी, सैम हिग्गीबॉटम इंस्टीस्ट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंस इलाहाबाद, शोभित यूनिवर्सिटी मेरठ, श्रीधर यूनिवर्सिटी, सिम्हापुरी यूनिवर्सिटी और मानव भारती यूनिवर्सिटी, हिमाचल प्रदेश।

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