मां-बाप ने मुंह फेरा, कम्प्यूटर सीखने गई तो फंसी जिस्म के सौदागरों के जाल में

मां-बाप ने मुंह फेरा, कम्प्यूटर सीखने गई तो फंसी जिस्म के सौदागरों के जाल में
Rape

deepak dilliwar | Publish: Dec, 23 2016 11:30:00 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

नाबालिग बेटी की एक गलती बर्दाश्त नहीं कर पाए मां-बाप और उससे मुंह फेर लिया, जब बालिका अपना जीवन खुद संवारने निकली तो मानव तस्करों के जाल में फंस गई और उसे जिस्मफरोशी के दलदल में धकेल दिया

रायपुर. कोलकाता का एक संभ्रात परिवार अपनी नाबालिग बेटी की एक गलती बर्दाश्त नहीं कर पाया और उससे मुंह फेर लिया। जब बालिका अपना जीवन खुद संवारने निकली तो मानव तस्करों के जाल में फंस गई और फिर उसे जिस्मफरोशी के दलदल में धकेल दिया गया। कोलकाता से रायपुर पहुंचने तक उसे कई बार अमानवीय कृत्य सहना पड़ा। मानसिक और शारीरिक यातना झेल रही 17 वर्षीय बालिका की दर्द भरी दास्तान सामने आई तो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे नारों की हकीकत उजागर हो गई। साथ ही मानव तस्कर और जिस्मफरोशी का धंधा करने वालों का मजबूत नेटवर्क का भी खुलासा हो गया। इसके सामने तमाम सुरक्षा एजेंसियां फेल हो गई है। उल्लेखनीय है कि बुधवार को रायपुर के कोटा स्थित एक ब्यूटी पार्लर में पीडि़त बालिका को खिलेश्वर देवांगन और अनिता बादानी लेकर पहुंचे थे। पीडि़ता ने किडनैप-किडनैप होने का शोर मचाया था। इसके बाद पीडि़ता से देहव्यापार कराने का पता चला। पीडि़ता बालिका ने घर (कोलकाता) से लेकर रायपुर पहुंचने तक की व्यथा का खुलासा किया।

मां-बाप नहीं ले गए घर
बालिका 11वीं की छात्रा है और एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखती है। करीब 7 माह पहले अपने एक दोस्त के साथ घर लौट रही थी। पुलिस वालों ने उसे पकड़ लिया। इसकी जानकारी परिजनों को हुई। परिजनों बालिका को घर में रखने से इनकार कर दिया। बालिका को सोनारपुर बालआश्रम में भेज दिया गया। बताया जाता है कि बालिका ने कई बार परिवार वालों से उसे ले जाने की मांग की। कोई नहीं आया।

कंप्यूटर सीखकर कुछ करना चाहती थी
बालिका के मुताबिक मां-बाप उसे नहीं ले गए तो उसके पास कोई सहारा नहीं था। जीने के लिए भी कुछ नहीं था। कंप्यूटर की थोड़ी बहुत जानकारी थी। इसे और सीखना चाहती थी, लेकिन बाल आश्रम में व्यवस्था नहीं थी। इसलिए बाहर निकलकर कंप्यूटर सीखना चाहती थी, ताकि उसके जरिए जिंदगी चला सके।

मानव तस्कर ले गए
इस बीच बाल आश्रम में चार बांग्लादेशी बालिकाएं भी पहुंची। उनके पास पासपोर्ट नहीं था। कुछ दिन साथ रहने के बाद बांग्लादेशी बालिकाओं ने बाल आश्रम से भागने की योजना बनाई और उसे बाहर निकलकर कंप्यूटर सिखाने का आश्वासन दिया। इसके बाद वह भी उनके साथ चली गई। बाल आश्रम के बाहर एक कार खड़ी थी। बांग्लादेशी बालिकाओं के साथ कार में बैठ गई। इस दौरान मुझे कुछ पिलाया गया। इससे मैं सो गई। इसके बाद ट्रेन में बैठाया गया। फिर मुंबई पहुंच गए।

मुंबई से गायब हो गई बांग्लादेशी बालिकाएं
पीडि़ता ने बताया कि मुंबई में एक फ्लैट में रखा गया। वहां से चारों बांग्लादेशी बालिकाएं कहीं चली गई। फ्लैट में एक युवती और युवक थे। युवक ने पीडि़ता से अनाचार किया। इसके बाद पीडि़त बालिका को धमकाया गया कि उसे जिस्मफरोशी कराने लाया गया है कंप्यूटर सिखाने नहीं। पीडि़ता इसके लिए राजी नहीं हुई। इसके बाद युवती ने उसे रायपुर भेजा और भरोसा दिलाया कि उसे वहां कंप्यूटर सिखाया जाएगा। अगले दिन ट्रेन से उसे खिलेश्वर के पास रायपुर भेजा गया। यहां एक फ्लैट में रखा गया और दुष्कर्म किया गया।

पहले से टिकट तैयार था
पीडि़ता के मुताबिक कोलकाता बाल आश्रम से रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां एक बुजुर्ग व्यक्ति मुंबई का टिकट पहले से लेकर रखा था। स्टेशन पहुंचते ही उसने ट्रेन में बिठाया और मुंबई भेज दिया।

दो दिन बाद भी पुलिस दर्ज नहीं करा पाई बयान
पीडि़त बालिका का दो दिन बाद भी बयान पूरा नहीं करा पाई है। पहले दिन न मुलाहिजा कराया गया और न ही बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) में बयान। अगले दिन भी केवल सीडब्ल्यूसी में बयान हुए। न्यायालय में धारा-164 का बयान भी पुलिस नहीं करा पाई है। मानसिक और शारीरिक रूप से पीडि़त बालिका को पुलिस लगातार घुमा रही है। दूसरी ओर आरोपी खिलेश्वर और महिला के रिश्तेदारों ने बालिका का बयान बदलवाने के लिए जुगाड़ शुरू कर दी है।

कबीर नगर थाना प्रभारी व प्रशिक्षु डीएसपी अनुज कुमार ने बताया कि बालिका का धारा 164 का बयान नहीं हो पाया है। सीडब्ल्यूसी में भी बयान पूरा नहीं हुआ है। आरोपियों को रिमांड पर लिया गया है।

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