बेला भाटिया और नंदिनी सुंदर का नक्सल पीडि़तों ने किया विरोध

नक्सल पीडि़तों ने मंगलवार को माओवादी प्रभावित जिले बस्तर के कोंटा में धरना-प्रदर्शन कर वकीलों के खिलाफ आक्रोश जताया है।

By: deepak dilliwar

Published: 23 May 2017, 02:46 PM IST

रायपुर. नक्सल पीडि़तों ने मंगलवार को माओवादी प्रभावित जिले बस्तर के कोंटा में धरना-प्रदर्शन कर वकीलों के खिलाफ आक्रोश जताया है। पीडि़तों ने एक दिन का सांकेतिक प्रदर्शन कर वकीलों की कार्यप्रणाली पर सवाल दागे। उन्होंने सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता बेला भाटिया और दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर का भी विरोध किया। नक्सल पीडि़त लोग मानवाधिकार कार्यकताओं के कार्यशैली से नाराज हैं। उनके खिलाफ आक्रोश जताने काफी संख्या में नक्सल पीडि़त धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए।

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बता दें कि बंदी प्रत्यक्षीकरण के तहत सरेंडर नक्सली पोडियम पांडा को सोमवार को बिलासपुर हाईकोर्ट में पेश किया गया। उसने उस समय महिला वकीलों पर आरोप लगाया कि उन लोगों ने उसकी पत्नी से बरगलाकर उससे मिलने तक नहीं दिया। आज पांडा के समर्थन में पीडि़तों ने धरना-प्रदर्शन किया।

इसके अलावा पांडा ने यह भी स्वीकार किया था कि उसने पुलिस के दबाव में सरेंडर नहीं किया है बल्कि नक्सलियों के अमानवीय हरकतों से तंग आकर पुलिस के सामने समर्पण किया है। उसने कोर्ट के सामने स्वीकार किया कि बिना किसी दबाव के पुलिस के सामने सरेंडर किया है।

जाने क्या कहा था पांडा ने

- सुकमा के बुरकापाल हमले में शामिल था नक्सली पोडियम पांडा ।

- सोमवार को उसे हाईकोटज़् में पेश किया गया।

- कोटज़् के सामने उसने बयान दिया कि वह बिना किसी दबाव के सरेंडर किया है।

- वह नक्सलियों के ज्यादती से परेशान हो गया था।

- पांडा ने महिला वकीलों के खिलाफ  पुलिस शिकायत दजज़् कराई है।

- उसने आरोप लगाते हुए कहा कि महिला वकील ईशा खंडेलवाल, शालिनी गेरा, सुधा भारद्वाज ने उसकी पत्नी को बरगलाकर उससे मिलने तक नहीं दिया।


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