जिंदगी में लक्ष्यभेदी बनकर किया मुकाम हासिल - Subodh Singhania

जिंदगी में लक्ष्यभेदी बनकर किया मुकाम हासिल - Subodh Singhania

deepak dilliwar | Publish: Jun, 02 2016 11:49:00 AM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

प्रदेश की राजधानी रायपुर में सिंगापुर की तर्ज पर सिंगापुर सिटी जैसा प्रोजेक्ट लॉन्च कर एक अलग पहचान बनाने वाले सिंघानिया बिल्डकॉन के सक्सेस का क्या है मन्त्र जाने डायरेक्टर सुबोध सिंघानिया की जुबानी

चन्द्रमोहन द्विवेदी/रायपुर. प्रदेश में रेसिडेंशियल, कमर्शियल या कॉलोनाइजिंग प्रोजेक्ट हों, सिंघानिया बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड ने अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रदेश की राजधानी रायपुर में सिंगापुर की तर्ज पर सिंगापुर सिटी जैसा प्रोजेक्ट लॉन्च कर एक अलग अनुभव इसी कंपनी ने दिया। भले ही इन प्रोजेक्ट से साथ हजारों लोगों के आशियाने के सपने को पूरा करने का काम सिंघानिया बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड ने किया है, लेकिन इसके पीछे संघर्ष और मेहनत की कहानी भी लंबी है।

यह सब-कुछ आखिर कैसे संभव हो पाया, इसकी  कहानी सिंघानिया बिल्डकॉन प्रा. लिमि. के डायरेक्टर सुबोध सिंघानिया की जुबानी...

''मैं वर्ष 1987 में जब रायपुर आया तो खुद यहां किराए के मकान में रहता था। तब भी यह सोच थी कि काश यहां अपना भी घर हो। अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करनी थी, जो अब बढ़कर दूसरों के आशियाने के सपने को पूरा करने की हो गई। लेकिन यह आसान नहीं था। एक लंबा वक्त और संघर्ष इस मुकाम तक पहुंचने के लिए तय करना पड़ा। आज भी याद है जब हम गंडई में रहा करते थे। पिताजी श्यामलाल जी सिंघानिया का सोने-चांदी का छोटा सा व्यापार था। स्कूली जीवन में ही चाचाजी के साथ तेंदूपत्ता के व्यापार में उनकी मदद करता था। दसवीं तक गंडई में  पढ़ाई करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए रायपुर आया। यहां दो साल तक हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। फिर देवपुरी में रहने लगा, जहां से कालीबाड़ी तक साइकिल से रोजाना पढ़ाई करने आता था। इस दौरान चाचाजी के व्यापार में भी मदद करता रहा।

ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद कुछ काम करने की लालसा के साथ बिहार चले गए, जहां किए गए काम में नुकसान ने हिम्मत तोड़ दी। लेकिन फिर नई शुरुआत के लिए महाराष्ट्र के आमगांव गए और राइस मिल किराए पर लेकर काम शुरू किया। इसमें कुछ लाभ हुआ। इस बीच वर्ष 1990 में पिताजी ने रायपुर के सदर बाजार में दुकान लेकर सोने-चांदी का होलसेल का काम शुरू किया। मैं कुछ अलग करना चाहता था, इसलिए मैंने घरवालों से रियल इस्टेट में काम करने की इच्छा जताई। यह बड़े भैया स्व. सुभाष सिंघानिया का भी सपना था। इसी ओर आगे बढ़ते हुए 1993 में सिंघानिया बिल्डकॉन की नींव रखी। 23 साल पहले शुरू किए गए इस काम में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ता गया और हमेशा लक्ष्यभेदी की नीति पर काम करता रहा। पहले प्रोजेक्ट हर्षित विहार से लेकर अब तक सिंगापुर सिटी, हर्षित कॉर्पोरेट, हर्षित नियो सिटी, हर्षित लैण्डमार्क और अब हर्षित हारमोनी के दौरान हमेशा दिमाग में यह बात रही कि कभी भी लोगों का विश्वास टूटने न पाए। उच्च गुणवत्ता के साथ ग्राहकों के सपने पूरे हों।'

जीवनसंगिनी का रहा हमेशा साथ
'मैंने कॅरियर के लिए जो भी फैसले लिए, उसमें मेरी जीवन संगिनी मिनाली का हर कदम पर साथ रहा। इस दौरान कई प्रोजेक्ट्स के लिए उन्होंने मुझे प्रेरित किया और प्लानिंग से लेकर ग्राउंड पर भी मेरा पूरा सहयोग किया। फाइनेंस के
मामले मिनाली खुद
संभालती हैं, इसलिए मुझे लेन-देन जैसे मामलों में उलझने से मुक्ति मिली और मैं
तनावरहित रहते हुए प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए काम कर पाता हूं।'

इसलिए बढ़ पाया आगे
'सिंघानिया बिल्डकॉन के हर प्रोजेक्ट में वैधानिक निर्माण नियमों का पालन, गुणवत्तायुक्त निर्माण, ग्राहकों की
जरूरत, समय पर पजेशन, आम आदमी के लिहाज से अत्यल्प और वास्तविक कीमत जैसे बिंदुओं को ध्यान में रखा। यही कारण रहा कि लोगों ने काम को सराहा और हम आगे बढ़ पाए।'

यह हैं सुबोध सिंघानिया के सक्सेस मंत्र


काम एेसा करो कि लोगों का विश्वास बना रहे।
हर काम में लोगों की जरूरतों का ध्यान रखने के साथ गुणवत्ता को महत्व दिया जाए।
सफलता के लिए धैर्य जरूरी है।

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