रक्षाबंधन पर्व: कोरोना काल में साड़ी और गिफ्ट की दुकाने बंद होने से इस वर्ष बहनों का तोहफा रहेगा उधार

रक्षाबंधन पर्व पर जब भाई-बहनों के ठहाकों से घर का कोना-कोना गूंजित हुआ करता था, लेकिन, कोरोना काल में न तो बसें चल रही हैं न ही ट्रेनें। सख्त लॉकडाउन भी 6 अगस्त तक है, क्योंकि कोरोना का खतरा तेजी से बढ़ा है। 3 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व है और 1 से 3 अगस्त तक छुट्टी होने से डाकिया भी घर नहीं आएगा।

By: Dinesh Kumar

Published: 01 Aug 2020, 12:38 PM IST

भाईयों को राखी खरीदने के लिए बाजार में उमड़ी बहनों की भीड़
पार्सल ट्रेन से रायपुर पहुंचा खोवा, अब घरों में ही बनेंगे पकवान

रायपुर. रक्षाबंधन पर्व पर जब भाई-बहनों के ठहाकों से घर का कोना-कोना गूंजित हुआ करता था, लेकिन, कोरोना काल में न तो बसें चल रही हैं न ही ट्रेनें। सख्त लॉकडाउन भी 6 अगस्त तक है, क्योंकि कोरोना का खतरा तेजी से बढ़ा है। 3 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व है और 1 से 3 अगस्त तक छुट्टी होने से डाकिया भी घर नहीं आएगा। ऐसे में जो बहनें शहर के आसपास हैं, वह भाइयों का तिलक कर रक्षासूत्र बांध सकेंगी, लेकिन तोहफा जिन्होंने पहले से ऑनलाइन बुकिंग से मंगा चुके हैं, वे ही भेंट कर पाएंगे। वरना, नकदी करेंसी से ही बहनों को संतोष करना पड़ेगा।
रेलवे की कोविड-19 पार्सल ट्रेन से गुजरात के सूरत और अहमदाबाद से खोवा की खेप आ चुकी है, जिसे कारोबारी टाटा-एस और कार से जिलों में भेज रहे हैं। छोटे कारोबारी ऐसे वाहनों से राजधानी आकर ले भी जा रहे हैं। क्योंकि रक्षाबंधन पर्व पर सबसे अधिक मांग मिठाइयों की ही रहती है। लॉकडाउन के कारण तोहफा और साड़ी की दुकानें बंद हैं। जिला प्रशासन द्वारा शुक्रवार और शनिवार को सुबह 10 बजे तक ढील के कारण गोलबाजार, चिकनी मंदिर के पास और मालवीय रोड पर राखी की दुकानों में काफी भीड़ रही। मिठाई की दुकानें बंद ही पड़ी हैं। यहां कि शहर के अनेक जगहों पर जहां सप्ताहभर पहले से गिफ्ट और राखियों की दुकानें आधी सड़क तक सज जाती थी, वैसा कहीं नहीं है। ऐसे में लोग किराना दुकानों से भी राखियांं खरीदते रहे।

जनशताब्दी ट्रेन भी फुल, बहनें नहीं आ पाएंगी

इस कोरोना काल के कारण भाई-बहन के पवित्र प्रेम का पर्व रक्षाबंधन भी फीका ही रहेगा, क्योंकि अनेक जिलों में रहने वाली बहनें नहीं आ पाएंगी। राज्य के अंदर रेलवे सिर्फ एक ट्रेन रायगढ़ से गोंदिया के बीच जनशताब्दी एक्सप्रेस चल रहा है। वह ट्रेन पहले से फुल है, क्योंकि इसमें भी रिजर्वेशन कराकर सफर करने की सख्त पाबंदी लगी हुई है। जबकि पहले टिकट जनरल काउंटर से टिकट लिए और ट्रेन में बैठने की सीट मिली या नहीं खड़े-खड़े भी आ-जा सकते थे। लेकिन इस बार बिना रिजर्वेशन टिकट के रेलवे अमला स्टेशन के गेट से ही वापस कर देगा। जो पहले रिजर्वेशन टिकट ले चुके हैं, वह बहनें ही आ सकेंगी।

कोरोना काल में कम हुई बाजार पर निर्भरता

सामाजिक कार्यकर्ता मधु यादव कहती हैं कि भइया खमतराई क्षेत्र में रहते हैं, इसलिए राखी बांधने जरूर जाएंगी। कोरोना के कारण उत्सव जरूर फीका पड़ गया है। लेकिन, सबसे बड़ी बात है कि बाजार पर निर्भरता खत्म हो गई है। रक्षाबंधन पर्व पर घर में ही मिठाइयां और पकवान बनेगा और एक साथ पूरा परिवार खुशियां मनाएगा। कई महिला समूहों ने अवसर में बदला है, देसी राखियां बनाने में वे अपनी कलाओं और हुनर साबित किया है।

Dinesh Kumar Reporting
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