16 हजार किसान गरीब बनकर उड़ाते रहे सस्ता चावल, अब रद्द होंगे राशन कार्ड

राज्य शासन द्वारा गरीब व जरूरतमंद परिवारों को सस्ते दर पर पीडीएस के माध्यम से राशन मुहैया कराया जाता है। इसके लिए आर्थिक स्थिति और कृषि जोत को आधार बनाकर हितग्राहियों को अलग-अलग श्रेणी के राशन कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।

By: Karunakant Chaubey

Published: 16 Sep 2020, 11:14 PM IST

दुर्ग. जिले के 16 हजार किसान गरीब बनकर सरकारी राशन दुकानों से सस्ता चावल उड़ाते रहे। पिछले सीजन में समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के आंकड़ों से इसका खुलासा हुआ है। समर्थन मूल्य पर तय मात्रा से ज्यादा धान बेचने और खुद को गरीब बताकर सरकारी दुकानों से सस्ता राशन लेने वाले ये किसान अब पीडीएस से बाहर होंगे।

इसके लिए इन किसानों के पात्रता का सत्यापन किया जाएगा और राशन कार्ड रद्द किए जाएंगे। राज्य शासन द्वारा गरीब व जरूरतमंद परिवारों को सस्ते दर पर पीडीएस के माध्यम से राशन मुहैया कराया जाता है। इसके लिए आर्थिक स्थिति और कृषि जोत को आधार बनाकर हितग्राहियों को अलग-अलग श्रेणी के राशन कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।

इसी तरह समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के लिए भी जमीन के जोत के आधार पर पैमाना तय किया गया है। राशन कार्ड की पात्रता के लिए दी गई जानकारी और समर्थन पर धान बिक्री के आंकड़ों के मिलान में अंतर की स्थिति सामने आई है।

इस तरह समझें गड़बड़ी को

-10840 लोगों ने खुद को भूमिहीन कृषि मजदूर बताकर प्राथमिकता श्रेणी का राशन कार्ड बनवा रखा है। पिछले खरीफ सीजन में इनके आधार नंबर से भी धान बेचा गया है।

-5112 किसानों ने खुद को सीमांत यानि ढाई एकड़ से कम जमीन का मालिक बताकर प्राथमिकता कार्ड बनवाया है। जिन्होंने प्रति एकड़ 15 क्विंटल यानि 40 क्विंटल से अधिक धान विक्रय किया है।
-20 किसानों ने 75 क्विंटल से अधिक धान पिछले खरीफ सीजन में बेचा है, लेकिन खुद को लघु कृषक यानि 5 एकड़ से जमीन का मालिक बताकर प्राथमिकता वाला कार्ड प्राप्त किया है।

इस तरह समझें नफा-नुकसान को

राज्य शासन द्वारा भूमिहीन, कृषि मजदूर, सीमांत और लघु किसानों को अंत्योदय और प्राथमिकता श्रेणी के राशन कार्ड दिए गए हैं। इस श्रेणी के हितग्राहियों को हर माह एक रुपए की दर से 35 किलो तक चावल दिया जाता है। इसके अलावा नमक, चना का लाभ भी मिलता है। वहीं एपीएल श्रेणी के हितग्राहियों को प्रति किलो 10 रुपए किलो की दर से भुगतान करना पड़ता है।

आधार नंबर के मिलान से सामने आया सच

राशन कार्ड बनवाने के दौरान हितग्राहियों के साथ पात्रता को लेकर घोषणा पत्र और आधार नंबर लिया गया है। इसी के आधार पर अलग-अलग श्रेणी का राशन कार्ड बनाया गया है। धान खरीदी के भुगतान के लिए भी आधार लिंक कराया गया है। दोनों के लिए जमाकर कराए गए आधार के मिलान में पात्रता के दावा और धान की बिक्री में अंतर पाया गया है।

इस तरह किया जाएगा सत्यापन

खाद्य विभाग के राशन कार्ड और धान बिक्री के पंजीयन के आधार पर किसान चिन्हित किए गए हैं। जिला प्रशासन की टीम द्वारा पंचायतों में जाकर इन हितग्राहियों के जमीन के दस्तावेज मंगाकर जांच की जाएगी। जांच में राशन कार्ड के लिए दी गई जानकारी और धान बिक्री के आंकड़ों को सामने रखकर पात्रता का सत्यापन किया जाएगा।

नई पात्रता के हिसाब से बन सकेंगे कार्ड

हितग्राही पात्रता में प्रमाणित नहीं हुआ तो राशन कार्ड रद्द कर दिया जाएगा। चाहे तो नई पात्रता के हिसाब से नया राशन कार्ड बनवा सकेगा। सत्यापन में जिनके पास 5 एकड़ से कम जमीन पाई जाएगी उन्हें प्राथमिकता श्रेणी और इससे अधिक पर एपीएल श्रेणी का कार्ड बनाने की पात्रता रहेगी।

22 से 26 के बीच होगा सत्यापन

कलेक्टर ने राज्य शासन के निर्देश पर हितग्राहियों के पात्रता के सत्यापन का निर्देश जारी किया है। इसके लिए 22 से 26 सितंबर तक की मियाद तय की गई है। इस बीच कलेक्टर द्वारा नियुक्त जांच दल में शामिल अधिकारी व कर्मचारी पंचायतों में जाएंगे और हितग्राहियों के पात्रता का सत्यापन करेंगे। इसके बाद अपात्र राशन कार्डों को निरस्त किया जाएगा।

राशन कार्ड की श्रेणी और धान बिक्री के आंकड़ों के आधार पर हितग्राहियों की पात्रता का सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन में जिसकी पात्रता प्रमाणित नहीं होगी उनका राशन कार्ड निरस्त कर दिया जाएगा। वहीं जिसकी जिस श्रेणी में पात्रता पाई जाएगी, हितग्राही चाहे तो उसके अनुसार नया राशन कार्ड बनवा सकेगा।

-सीपी दीपांकर, खाद्य नियंत्रक दुर्ग।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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