दस्तावेजों में कांटछांट करने वाली कंपनी पर कार्रवाई की बजाय फिर टेंडर देने की तैयारी

- सीजीएमएससी का कारनामा : कंपनी को न ब्लैक लिस्टेड किया और न एफआईआर दर्ज कार्रवाई .

By: Bhupesh Tripathi

Published: 28 May 2021, 05:07 PM IST

रायपुर । छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) ने एक टेंडर में डीआरडीओ (रक्षा मंत्रालय) के दस्तावेज में कांट छांट कर टेंडर हथियाने की कोशिश करने वाली कंपनी पर सात माह बाद भी कार्रवाई न कर उसी कंपनी को दूसरे टेंडर के लिए एलिजिबल कर दिया है।

दरअसल, 13 मई को सीजीएमएससी ने टेंडर क्रमांक आरसी/76938/ निविदा निकाली, इसमें 22 मई को पात्र होने वाली कंपनियों की सूची जारी की गई। जिसमें निविदा में भाग लेने वाली पांच कंपनियों में से दो कंपनियों को बाहर कर दिया गया। पूूर्व निविदा में रक्षामंत्रालय के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वाली पीड इंटरप्राइजेस को पात्र की श्रेणी में रखा गया है। जबकि निविदा नियमों के अनुसार फर्जी दस्तावेज जमा करने वाली फर्म पीडी इंटरप्राइजेज को काली सूची में डालकर उसकी सुरक्षा निधि राजसात करने का प्रावधान है।

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राज्यपाल तक हुई थी शिकायत
ई प्रिक्योरमेंट निविदा क्रमांक 67832 जो की पीपीई (कवर ऑल ब्रीथेवल फेब्रिक) में गड़बड़ी की शिकायत राज्यपाल और स्वास्थ्य मंत्री के पास भी की गई थी। निविदा से कंपनी को तो बाहर कर दिया गया था। ई प्रिक्योरमेंट निविदा क्रमांक 67832 जो की पीपीई (कवर ऑल ब्रीथेवल फेब्रिक) किट की निविदा 17 सितंबर को बुलाई गई थी।

ऐसे की थी गड़बड़ी
कंपनी द्वारा निविदा में जो दस्तावेज प्रस्तुत फर्जी पाए गए थे। निविदा में कवर ऑल ब्रीथेवल फेब्रिक नॉन लेमिनेटेड कपड़ा का मांगा गया था। कंपनी ने डीआरडीओ से नॉन लेमिनेटेड कपड़े की टेस्ट करवाई ही नहीं। सीजीएमएससी ने अपनी निविदा में नॉन लेमिनेटेड पीपीई किट मांगी। इसके बाद कंपनी ने डीआरडीओ के सर्टिफिकेट क्रमांक कोविड-19 बीकेएस 01 जिसमें लेमिनेटेड लिखा था उस सर्टिफकेट में काट-छांट करके उसे नॉन लेमिनेटेड कर दिया और निविदा में चयनित भी हो गई थी।

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सीजीएमएससी की इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं

- संजीवनी 108 की निविदा में हुई गड़बड़ी की शिकायत

- रेमडेसिविर इंजेक्शन की निविदा में एल-1 आने के बाद सिप्ला ने नहीं की सप्लाई, दोबारा निविदा में 17 करोड़ का नुकसान।

- कंज्यूमेबल कोड सी-47-5 इंडोट्रैकियल कफ्ड ट्युब 5.5 की मूल्य 37.50 रुपए की खरीदी 504 रुपए में करोड़ों का नुकसान।

- एसडी बायोसेंसर कंपनी से 123 रुपए में किट की खरीदी, जबकि एक अन्य कंपनी 36.60 पैसा में की सप्लाई।

- ब्लड गैस एनालाइजर की खरीदी मामला विधानसभा में उठने के बाद भी कार्रवाही नहीं।

- ब्लड सेल काउंटर मशीन गैर ओईएम से हुई खरीदी।

- दवाओं के सेंपल फेल होने पर भी कार्रवाई नहीं।

मामले की शिकायत नहीं मिली है। प्रकरण मेरे कार्यकाल के पहले का है। मैं जानकारी लेता हूं।
- कार्तिकेयन गोयल, एमडी, सीजीएमएससी

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Bhupesh Tripathi
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