फसलों को बचाने 1 जुलाई से शुरू होगा रोका-छेका अभियान

मुख्यमंत्री ने खरीफ फसलों की सुरक्षा और पशुओं को वर्षा ऋतु में होने वाली गलघोंटू और एकटंगिया बीमारी से बचाने के लिए इस वर्ष भी 1 जुलाई से राज्य में रोका-छेका अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

By: Ashish Gupta

Updated: 23 Jun 2021, 10:52 AM IST

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) ने 1 से 15 जून तक गोठानों में क्रय किए गोबर की राशि सहित गोठान समितियों एवं स्व-सहायता समूहों को लाभांश के रूप में कुल 7 करोड़ 80 लाख रुपए की राशि का ऑनलाइन भुगतान किया। गोधन न्याय योजना (Godhan Nyay Yojana) के तहत अब तक गोबर विक्रेताओं को 96.64 करोड़ तथा गोठान समितियों एवं स्व-सहायता समूहों को 17.55 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने खरीफ फसलों की सुरक्षा और पशुओं को वर्षा ऋतु में होने वाली गलघोंटू और एकटंगिया बीमारी से बचाने के लिए इस वर्ष भी 1 जुलाई से राज्य में रोका-छेका अभियान (Roka Cheka Abhiyan) शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सुराजी गांव योजना के तहत गोठानों में चरागाह के लिए सुरक्षित भूमि में इस वर्ष अनिवार्य रूप से चरागाह विकसित करने के भी निर्देश दिए हैं।

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मुख्यमंत्री ने कहा गोधन न्याय योजना हमारी ऐसी योजना है, जिसका लाभ सालभर के भीतर ही इस योजना के हितग्राहियों सहित समाज को मिलने लगा है। इसके तहत क्रियाशील गोठानों में से 20 फीसदी गोठान स्वावलंबी हो चुके हैं। योजना के तहत व्यय की गई राशि अब लौटने लगी है। गोबर खरीदी से पशुपालकों को सीधा लाभ मिलने लगा है।

वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट सहित गोबर से अन्य सामग्री के निर्माण से महिला समूहों को रोजगार और लाभ होने लगा है। वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट की उपलब्धता और उनके उपयोग से किसानों को लाभ, जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से विष रहित खाद्यान्न का उत्पादन होगा। इसका फायदा समाज के सभी लोगों को मिलेगा। कार्यक्रम को कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में अन्य प्रमुख मंत्री व वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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समितियों के गठन के लिए 1 सप्ताह का समय
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य के उन गोठानों में जहां गोठान समितियों का गठन नहीं हुआ है, वहां प्रभारी मंत्रियों को जिला प्रशासन के समन्वय से एक सप्ताह के भीतर गोठान समिति की गठन की प्रक्रिया पूरी करें।

दूध की चार गुना कमी, उत्पादन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा छत्तीसगढ़ राज्य को रोजाना सवा तीन लाख लीटर दूध की आवश्यकता है, जबकि राज्य में 85 हजार लीटर दूध उत्पादित होता है। दूध की लगभग 4 गुना कमी है। इसकी पूर्ति के लिए पशुपालन को बढ़ावा, पशुधन के संरक्षण एवं संवर्धन और चारे का बेहतर प्रबंध करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सुपोषित हो, आवश्यकतानुरूप शुद्ध दूध एवं दुग्ध सामग्री लोगों को उपलब्ध हो, यह हमारी कोशिश होनी चाहिए।

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