7 साल से नहीं बढ़ी आरटीई की राशि, प्राइवेट स्कूल संचालकों ने फीस बढ़ाने की मांग की

दूसरे राज्यों से तुलना करते हुए शुल्क बढ़ाने की मांग की, समाधान नहीं मिलने पर कोर्ट जाने की धमकी दी

By: Nikesh Kumar Dewangan

Published: 22 Nov 2020, 07:51 PM IST

रायपुर. प्रदेश में निजी स्कूलों का संचालन करने वाले संचालकों ने आरटीई की भुगतान राशि बढ़ाने की मांग शिक्षा विभाग और राज्य सरकार से की है। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि दूसरे राज्यों की तर्ज पर प्रदेश में भी शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत दी जाने वाले राशि की बढ़ोत्तरी की जा सके।

निजी स्कूलों के संचालकों की मानें तो पिछले 7 साल से एक ही दर की राशि का भुगतान किया जा रहा है। विभाग शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत दी जाने वाले राशि की बढ़ोत्तरी नहीं करेगा, तो स्कूल संचालकों ने कोर्ट जाने की बात कही है।

12000 शुल्क की मांग कर रहे संचालक

वर्तमान में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा के अधिकार अधिनिमय के तहत प्रति छात्र पहली से लेकर कक्षा पांचवी तक 7 हजार, कक्षा छठवी से लेकर आठवीं तक 11 हजार भुगतान दिया जाता है। प्रदेश में पहली बार आरटीई के दायरे में आए कक्षा-9वीं से लेकर 12वीं तक के छात्रों को 14 हजार 500 रुपए भुगतान करने का आश्वासन विभाग ने दिया है।

दिल्ली में 26 हजार व राजस्थान में मिलता है 24 हजार 500

प्रदेश के निजी स्कूल संचालकों की मांग उठाने वाले छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों की मानें तो दिल्ली में कक्षा प्रायमरी में आरटीई के तहत सरकार 26 हजार और राजस्थान में 14 हजार 500 रुपए का भुगतान करती है। छात्रों की सुविधा का स्तर बढ़ रहा है, लेकिन सरकार स्कूल प्रबंधन पर ध्यान नहीं दे रही है।

छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि पिछले 7 वर्षों से आरटीई के तहत दी जाने वाले राशि की बढ़ोत्तरी विभाग ने नहीं की है। हमने पिछले दिनों विभागीय अधिकारी और मंत्रियों से मुलाकात करके शुल्क बढ़ाने की मांग रखी है।

स्कूल शिक्षा विभाग के संचालक जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि आरटीई का जितनी राशि तय है, उतना भुगतान हमारे द्वारा किया जा रहा है। भुगतान के कुछ पैटर्न में पिछले दिनों बदलाव किया है, इस वजह से भुगतान होने में थोड़ा लेट हुआ है।

Nikesh Kumar Dewangan Desk
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