RTI के तहत जानकारी न देने वाले अधिकारी पर लगा हजारों का जुर्माना

सूचना के अधिकार अधिनियम की जानकारी न देना हाउसिंग बोर्ड के जन सूचना अधिकारी को अब महंगा पड़ गया।

By: Deepak Sahu

Published: 25 Apr 2018, 11:47 AM IST

रायपुर . सूचना के अधिकार अधिनियम की जानकारी न देना हाउसिंग बोर्ड के जन सूचना अधिकारी को अब महंगा पड़ गया। राज्य सूचना आयोग ने उन पर 25000 रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही आवेदक को भी 5 सौ रुपए क्षतिपूर्ती देने का आदेश दिया है। यह राशि 30 दिन के भीतर देने को कहा गया है।

राज्य सूचना आयोग ने 20 मार्च 2017 को सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। इतना ही नहीं आयोग न यह भी कहा है कि आवेदक की दूसरी अपील को स्वीकार करते हुए सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 19(08)(क)(1) के तहत संपदा अधिकारी प्ररिक्षेत्र 2 हाउसिंग बोर्ड संभाग-3 सड्डू को निर्देशित किया है कि अपीलार्थी के आवेदन की स्पष्ट जानकारी पत्र के जारी होने की 30 दिन के भीतर नि:शुल्क दिया जाए।

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क्या है सूचना का अधिकार
इसके तहत आम जनता किसी भी सरकारी दफ्तर के कार्य से संबधित जानकारी मांग सकती है । संबधित विभाग को 30 दिन के भीतर व्यक्ति को जानकारी देनी पड़ती है ।

डेढ़ साल पहले मांगी गई थी सूचना
आरटीआई कार्याकर्ता शेषनारायण शर्मा ने 16 दिसंबर 2016 को हाउंसिंग बोर्ड के सड्डू संभाग से मकानों के आवंटितों की जानकारी मकान नंबर समेत मांगी थी। लेकिन उन्हें एक माह तक जानकारी नहीं मिली उसके बाद प्रथम अपील लगाई गई। प्रथम अपीली अधिकारी द्वारा भी कोई पत्र व्यवहार नहीं किया गया और न ही जानकारी दी गई। जिसके बाद मामला राज्य सूचना अयोग के पास पहुंचा।

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हुई है लापरवाही
सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 19 (6) तथा छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (अपील) नियम 2016 के अनुसार प्रथम अपील प्राप्ति तिथि 23 जनवरी 2017 के अधिकतम 45 दिवस में समाधान करना था। प्रथम अपील अधिकारी की लापरवाही तथा उनके सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधानों की प्रति अनदेखी की गई है।

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