साहित्यकार घलो रहिस केयूर भूसन ह

Gulal Verma

Publish: May, 17 2018 08:00:10 PM (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
साहित्यकार घलो रहिस केयूर भूसन ह

सुरता म

छ त्तीसगढ़ के माटी म एक ले बढ़ के एक हीरा बेटा-बेटी जनम लेवत रहिथे। फेर जेनमन अपन करम ले देस अउ अपन छत्तीसगढ़ महतारी के नांव ल ऊंच करथे वोला जुग जुग ले जाने माने जाथे।अइसन नांव स्वतंत्रता संगराम सेनानी केयर भूसन के हावय।
केयर भूसन के जनम 1 मार्च 1928 के दुरूग जिला के जांता गांव म होए रहिस। वोकर बाबूजी मथुरा परसाद मिस्र समाज सेवक रहिन। तेकर खातिर उंकर मन म सुरुच ले सेवा भाव भरे रहय। भूसन ह दाढ़ी गांव के इसकूल म पहिली कक्छा ले पढ़त रहिन। पांचवीं ल धमतरी म पढ़ीन। रायपुर घलो पढ़े बर गे रहिन। फेर, रात दिन देस के आजादी बर सोचत,गुनत रहय।
केयर भूसन ह 1942 म महात्मा गांधी के आह्वान म असहयोग आंदोलन म भाग लिन। जेल घलो गे रहिन। वो बछर म रायपुर केंदरीय जेल जवइया म भूसन सबले कम 14 बछर के लइका रहिस हावय।। देस सेवा, समाज सेवा के सेती वोला पढ़ाई छोड़े बर परिस। अपन गियान ल साहित्य म लगाइस। छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संगराम सेनानीमन के उपर किताब घलो लिखे हावय।
राजनीति ले घलो जुड़ाव बने रहिस। 1980-1990 तक सांसद रहिन। कतको अकन किताब परकाशित होय हावय। जेमा उंकर उपन्यास 1986 म 'कुल के मरजादÓ, 1999 म 'कहां बिलागे मोर धान के कटोराÓ परकासित होइस। बछ्र 2000 म कहिनी संगरह कालू भगत, 2003 म छत्तीसगढ़ी निबंध संगरह 'हीरा के पीराÓ परकासित होय रहिस। भारत अउ छत्तीसगढ़ म अलग अलग छेत्र म बने काम करइया 14 झन माइलोगनमन के व्यक्तित्व के उपर म आलेख ' छत्तीसगढ़ के नारी रत्नÓ 2002 म किताब परकासित होय हिस।
केयूर भूसन के कहिनी, कविता उपन्यास म नारी, भुथियार, गरीब, गांव उपर सिरजन मिलथे। वोहा सरल सुभाव अउ मिलनसार साइकिल के चलइया, सबो बर मयारूक मनखे रहिस। छत्तीसगढ़ साहित्य ल पोट्ठ करे बर हिदी, अंगरेजी के अड़बड़ गियान के रहत ले अपन छत्तीसगढ़ी भासा ल पोठ करे बर बड़ उदीम करत रहिन। वोकर कविता संगरह 1986 म 'लहर, 2000 म 'नित्य प्रवाहÓ, 2002 म 'मोर मयारूक गांवÓ परकासित होय रहिस।
केयूर भूसन ह पत्रकारिता के छेत्र म घलो आगू रहिन। छत्तीसगढ़ संदेस इंदौर के पत्रिका 'अंत्योदयÓ के संपादन करत रहिन हे। वोकर साहित्य म पं. रविसंकर सुक्ल विवि रायपुर म सोध काम घलो होय हे। उंकर 'छत्तीसगढ़ी साहित्य के उन्मूलनÓ म रमनी चन्द्राकर ल पीएचडी के उपाधि मिले हावय। जेकर परकासन 2015 म होय रहिस। छत्तीसगढ़ सासन ह केयूर भूसन ल पं. रविसंकर सुक्ल सद्भावना सम्मान 2001 ले नवाजे गे हे। कलाकारमन बर वोहा बड़का काम करिन। जम्मो कलाकारमन ल एक मंच म लायबर रायगढ़ म चकरधर सम्मान समारोह बर धियान धरे रहिन। छत्तीसगढ़ी बोली ल राज भासा बर सलगल परयास करत रहिन। उंकर नाटक 'सोना कैनाÓ, कहिनी 'मोंगराÓ, गीत 'बनिहारÓ जम्मो साहित्कारमन बर परेरनादायी रचना हावय। केयूर भूसन ह 3 अपरेल 2018 के हमन ल छोड़ के सरग सिधार गे।

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