बड़ी गड़बड़ी: छत्तीसगढ़ से महाराष्ट्र जा रही रेत, ओवरलोड की रायल्टी कर रहे जारी

- जिले से लेकर बॉर्डर तक आरटीओ और माइनिंग की टीम का पहला, फिर भी नहीं हो रही कार्रवाई .
- माइनिंग चौकियों में जांच के बाद भी मिलता है .

By: Bhupesh Tripathi

Published: 25 Sep 2020, 12:05 AM IST

रायपुर. खनिज विभ्भाग की ओर से शासन के आदेश का ख्खुला उल्लंघन किया जा रहा है। पत्रिका को एेसी रॉयल्टी पर्चिंयां मिली हैं, जिनमें ट्रक की भ्भार क्षमता से दोगुना रेत परिवहन की रॉयल्टी जारी कर दी गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बड़ी गड़बड़ी में जिला प्रशासन का ख्खनिज विभाग और परिवहन विभ्भाग दोनों बराबर के जिम्मेदार हैं। ख्खनिज विभ्भाग लिख्खित में ओवरलोड वाहन को खुली अनुमति प्रदान कर रहा है। दूसरी ओर, परिवहन विभ्भाग की छूट भी बराबर मिल रही है। प्रदेश से महाराट्र रेत की सप्लाई की जा रही है। वाहन क्रमांक सीजी ०७ सीए ६७८३ को २० घन मीटर रेत धमतरी के सरगी चंद्रपुर (महाराट्र) के लिए २२ सितंबर को रॉयल्टी काटी गई थी।

यह रॉयल्टी पर्ची धमतरी के अस्थिाई रेत भंडारणकर्ता जितेंद्र कुमार द्वारा जारी की गई थी। जिस वाहन के लिए २० घन मीटर रेत लोड देकर लिखित में रॉयल्टी जारी की गई, उसकी भार क्षमता १० घन मीटर है। विभाग परिवहन और खनिज विभाग इस वाहन पर कार्रवाई करता, तो विभाग को ३० हजार रुपए राजस्व प्राप्त होता। अधिकारियों की मिलीभगत से इस तरह लाख्खों रुपए की चपत हर माह शासन को लगती है।

यह है निमय
हाइवा वाहन १० व्हीलर्स की पासिंग १० घन मीटर (३५० फिट) या (१४ टन) परिवहन विभ्भाग द्वारा तय है। इससे ज्यादा परिवहन पर वाहन पर कार्रवाई की जाती है। निर्धारित क्षमता से अधिक भ्भार वाले वाहनों पर पहला टन यदि परिवहन विभ्भाग कार्रवाई करती है, तो ९००० पहले ओवरलोड टन का। उसके अतिरिक्त जितना भ्भी अधिक ओवर लोड है, प्रत्येक टन के हिसाब से ३००० रुपए का जुर्माना लागया जाता है। परमिट शर्तो के उल्लंघन का ५००० रुपए लिया जाता है। इसी तरह यातायात पुलिस जुर्माना करती है, तो ३००० रुपए जुर्माना पहला ओवरलोड टन का। इसके अलावा प्रत्येक ओवर लोड टन पर १-१ हजार रुपए जुर्माना होता है। परमिट शर्तों के उल्लंघन का २२ सौ रुपए जुर्माना लगता है।

माइनिंग चौकिंयों पर एंट्री कर छोड़ रहे
इस तरह हर रोज सैकड़ों वाहन रेत भरकर अलग-अलग राज्य और जिले में जाते हैं। इन सभ्भी की एंट्री माइनिंग चौकिंयों में की जाती है। जबकि, एेसे वाहनांे पर कार्रवाई करने का प्रावधान है। लेकिन लिख्खित में गलत रॉयल्टी जारी की जा रही है, उसे सही करार देकर छोड़ा भ्भी जा रहा है।

राज्य के बार्डर पर बनी परिवहन चेक पोस्ट में भी ओके
राज्य के भीतर परिवहन उडऩदस्ता और राज्य के बार्डर में चौकिंया बनाई गई हैं। इन सभ्भी जगहों से ओवरलोड वाहन ख्ख्खुलेआम दौड़ाता हुआ निकल जाता है। जांच चौकियों में रॉयल्टी की जांच भ्भी होती है, लेकिन उसे दूसरे राज्य के लिए छोड़ दिया जाता है।

मामले की जानकारी खनिज विभाग और परिवहन विभाग से मांगी जाएगी। अख्खिर एेसी गड़बड़ी कैसे हो रही है। इसके बाद कार्रवाई के निर्देश दिया जाएगा।
जीआर चुरेंद्र, संभ्भागायुक्त, रायपुर

Bhupesh Tripathi
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