scriptSant Kalicharan indecent thoughts on Mahatma Gandhi on dharm sansad | धर्म संसद में बिगड़े बोल : संत कालीचरण ने महात्मा गांधी पर रखे अमर्यादित विचार, कहा - गोडसे को नमस्कार, जिन्होंने गांधी को मारा | Patrika News

धर्म संसद में बिगड़े बोल : संत कालीचरण ने महात्मा गांधी पर रखे अमर्यादित विचार, कहा - गोडसे को नमस्कार, जिन्होंने गांधी को मारा

धर्म संसद से अपने आपको अलग करता हूं: महंत रामसुंदर दास महंत

रामसुंदर दास बोले- मैं आप सबसे पूछना चाहता हूं... इस धर्म संसद से जिस बात को बोला गया, आप लोग तो खूब ताली बजाए थे। क्या महात्मा गांधी सही में गद्दार थे

रायपुर

Published: December 27, 2021 02:46:27 am

रायपुर. राजधानी के रावणभाठा मैदान में आयोजित धर्म संसद में खुलेआम महात्मा गांधी पर अभद्र और अमर्यादित बोल से रविवार को बवाल मच गया। महाराष्ट्र के अकोला से आए संत कालीचरण ने मंच से धर्म विशेष के लोगों को टारगेट करते हुए देश के विभाजन के लिए महात्मा गांधी को कोसा। उन्होंने कहा कि मोहनदास करमचंद गांधी ने उस वक्त देश का सत्यानाश किया। नमस्कार है नाथूराम गोडसे को, जिन्होंने उन्हें मार दिया। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक और राज्य गोसेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास ने इस बयान का विरोध करते हुए मंच छोड़ दिया। वहीं अन्य संतों ने भी संत कालीचरण के बिगड़े भड़काऊ बोल पर नाराजगी जाहिर की है।

धर्म संसद में बिगड़े बोल : संत कालीचरण ने महात्मा गांधी पर रखे अमर्यादित विचार, कहा - गोडसे को नमस्कार, जिन्होंने गांधी को मारा
धर्म संसद में बिगड़े बोल : संत कालीचरण ने महात्मा गांधी पर रखे अमर्यादित विचार, कहा - गोडसे को नमस्कार, जिन्होंने गांधी को मारा

धर्म संसद का रविवार को दूसरा दिन था। शाम के वक्त संत कालीचरण को बोलने के लिए आमंत्रित किया गया। मंच पर आते ही उन्होंने 'जो हिंदू हित की बात करेगा ...'नारे से शुरुआत करते हुए देश के बंटवारे को लेकर गांधीजी को कोसने लगे और गोडसे को देशभक्त के रूप में पेश किया। उन्होंने महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार जैसे कृत्य के लिए भी हिंदुओं को चेताया। उन्होंने कहा कि कालीचरण ने कहा कि राजा यानी प्रधानमंत्री ऐसा होना चाहिए जो कट्टर हिंदूवादी हो। उस दौरान मंच से किसी भी साधु-संत ने टोका तक नहीं, बल्कि पंडाल में बैठे लोग तालियां बजा रहे थे। बता दें कि इस धर्म संसद का आयोजन नीलकंठ सेवा संस्थान और हिंदू परिषद ने दूधाधारी मठ के महंत रामसुंदर दास की अध्यक्षता में ही किया गया था। दो दिन पहले भाजपा नेता सच्चिदानंद उपासने और कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे ने संयुक्त रूप से धर्मसंसद को लेकर प्रेस क्लब में मीडिया से रूबरू हुए थे।

धर्मसंसद के मंच से ऐसी बात नहीं होनी चाहिए : महंत
राज्य गोसेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास ने कालीचरण के बयान का खुले मंच से विरोध किया। उन्होंने कहा कि मैं इस कार्यक्रम से ताल्लुक नहीं रखता। हालांकि आयोजकों ने उन्हें मुख्य संरक्षक बनाया था। भड़के हुए लहजे में रामसुंदर दास ने कहा कि मंच से महात्मा गांधी को गाली दी गई है, हम इसका विरोध करते हैं। यह सनातन धर्म नहीं और ना ही धर्म संसद के मंच पर इस तरह की बात होनी होनी चाहिए।

शोभायात्रा में शामिल हुए थे डॉ. रमन सिंह
रावणभाठा मैदान में 25 और 26 दिसंबर को धर्मसंसद आयोजित की गई थी। पहले दिन दूधाधारी मठ से शोभायात्रा निकली गई तो उसमें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी शामिल हुए थे। आयोजकों ने सनातन धर्म में ऋषि और कृषि संस्कृति पर चर्चा करने का हवाला देते हुए यह संसद आयोजित करने की बात कही थी।

धर्मसंसद में नहीं आए मुख्यमंत्री
आयोजकों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी धर्म संसद में आमंत्रित किया गया था, परंतु शाम को बवाल होने की सूचना पर मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए। हालांकि पहले से मुख्यमंत्री के मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम में धर्म संसद में शामिल होने का शेड्यूल जारी नहीं हुआ था।

अभद्र बातें करने वाला संत नहीं हो सकता : प्रमोद दुबे
नगर निगम के सभापति प्रमोद दुबे का कहना है कि धर्म संसद आयोजित करने वालों ने मुझसे सहयोग मांगा था, इसका उद्देश्य सनातन धर्म संस्कृति से युवाओं को अवगत कराना था। पहले से यह तय था, परंतु एक संत कालीचरण द्वारा महात्मा गांधी पर अभद्र टिप्पणी निंदनीय है। समाज को बांटने की बातें करने वाला संत नहीं हो सकता है।

विचार रखने के लिए हर कोई स्वतंत्र
धर्म संसद में हर कोई अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र था। यह उनके व्यक्तिगत विचार थे। इसमें आयोजकों की कोई भूमिका नहीं है। महंत जी इसकी अध्यक्षता कर रहे थे। यदि उसी समय टोक देते तो मामला खत्म हो जाता। उनके बाद 7-8 वक्ताओं ने अपनी बात रखी।
- सच्चिदानंद उपासने, भाजपा नेता व आयोजन समिति से जुड़े सदस्य

धर्म संसद से अपने आपको अलग करता हूं: महंत रामसुंदर दास
महंत रामसुंदर दास बोले- मैं आप सबसे पूछना चाहता हूं... इस धर्म संसद से जिस बात को बोला गया, आप लोग तो खूब ताली बजाए थे। क्या महात्मा गांधी सही में गद्दार थे, क्या महात्मा गांधी ***** थे? इस शब्द का उच्चारण किया गया इस मंच से। महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की उपाधि से नवाजा गया। उनके विषय में इस धर्म संसद से ऐसी बात? यह हमारा सनातन धर्म नहीं हो सकता। मैं बहुत क्षमा चाहता हंू आप सबसे। आपको बुरा लगा हो। मैं इस धर्म संसद से अपने आपको अलग करता हूं।

सनातन धर्म के प्रचार के लिए था आयोजन : पं.नीलकंठ
धर्मसंसद के आयोजक पंडित नीलकंठ त्रिपाठी ने कहा कि इस धर्मसंसद का आयोजन सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए किया था, जिससे युवा पीढ़ी को जानकारी मिले। इसमें राजनीतिक दल अथवा राजनीति के बारे में बयानबाजी नहीं होगी। सिर्फ धर्म के बारे में ही चर्चा होगी। हम संत कालीकरण के इस कृत्य के लिए माफी मांगते हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा यह सारे देश और विश्व का अपमान है। धर्म संसद में जिस प्रकार से महात्मा गांधी के बारे में अपशब्दों का उपयोग किया गया है उससे पूरे देश के लोग नाराज हैं। कालीचरण बाबा पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए। यह सारे देश और विश्व का अपमान है। धर्म संसद में जिस प्रकार से महात्मा गांधी के बारे में अपशब्दों का उपयोग किया गया है उससे पूरे देश के लोग नाराज हैं। कालीचरण बाबा पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए।
- मोहन मरकाम, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस

रावणभाठा ग्राउंड में आयोजित धर्मसंसद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी के लिए अपशब्दों का प्रयोग करने वाले कालीचरण महाराज के विरुद्ध प्रमोद दुबे की शिकायत पर थाना टिकरापारा में अपराध क्रमांक 578/2021 धारा 505(2), 294 आईपीसी के तहत अपराध दर्ज़ किया गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गइ है। - तारकेश्वर पटेल, एएसपी ईस्ट

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