उज्ज्वला को ग्रहण!

Gulal Verma

Publish: Jul, 13 2018 09:29:39 PM (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
उज्ज्वला को ग्रहण!

योजना का वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों को नहीं हो रहा

उज्ज्वला को ग्रहण!
योजना का वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों को नहीं हो रहा
रायपुर। उज्ज्वला योजना के पीछे सरकारों की जो मंशा है उसकी तारीफ करनी चाहिए। लेकिन साथ ही यह भी देखना महत्वपूर्ण है कि इस योजना का वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों को हो रहा है या नहीं। विशेष रूप से महिलाओं को कोयले व लकड़ी के चूल्हों से आजादी दिलाना बहुत जरूरी है। इस दिशा में उज्ज्वला योजना के जरिए किया जा रहा प्रयास अच्छा तो है, लेकिन कई हितग्राही उससे जुडऩे में तकलीफ महसूस कर रहे हैं। एक बार गैस सिलेंडर खत्म होने के बाद दूसरी बार सिलेंडर लेने की क्षमता उनकी नहीं हैं। दोबारा सिलेंडर नहीं लेने वालों में दो तरह के हितग्राही हैं। एक वो लोग हैं जो लकड़ी से चूल्हा जलाने के आदी हैं। ऐसे लोगों के बीच सरकार को जागरुकता लाने के प्रयास करने चाहिए। सिलेंडर के पैसे बचाने से बीमारियों के होने का खतरा है।
लकड़ी, कोयला या कंडे के जलने से जो धुआं निकलता है वह स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक है। लंबे समय तक धुएं के साथ जहरीले तत्व व कार्बन के कण सांस नली में जमा होने से वहां पर सूजन हो जाता है, जिसके कारण प्रभावित को सांस लेने में तकलीफ होती है। लिहाजा, गांवों को धुआंमुक्त बनाने के लिए सरकार को जागरुकता अभियान पहले से ज्यादा तेज करना होगा। सिलेंडर दोबारा न भरवाने वाले दूसरे तरह के जो लोग हैं उनकी आर्थिक स्थिति वाकई कमजोर है। सिलेंडर से सब्सिडी को धीरे-धीरे कम करते जाने का दुष्परिणाम है कि उसकी कीमत आठ सौ रुपए के आसपास पहुंच गई है। दूरदराज के गांवों तक सिलेंडर परिवहन में भी अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
चूल्हा जलाने से स्वास्थ्य ही खराब नहीं होता, बल्कि पर्यावरण को भी क्षति पहुंचता है। जलाऊ लकड़ी के लिए हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई अनवरत जारी है, जबकि पर्यावरण संतुलन और मानव जीवन की सुरक्षा के लिए हरियाली अत्यंत ही जरूरी है। बहरहाल, गांवों में जो बेहद गरीब परिवार हैं उनको उज्ज्वला योजना से जोड़े रखने के लिए सरकार को ठोस उपाय करने पड़ेंगे। उज्ज्वला योजना की जो कमियां हैं उनको दूर करके ही गांवों को धुआंमुक्त बनाया जा सकता है।

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