सावन में इस मंदिर के दर्शन करने से मिलता है उज्जैन महाकाल जैसा लाभ, पढ़ें पूरा इतिहास

सावन में इस मंदिर के दर्शन करने से मिलता है उज्जैन महाकाल जैसा लाभ, पढ़ें पूरा इतिहास

Akanksha Agrawal | Updated: 17 Jul 2019, 09:21:17 AM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

सावन माह की शुरूआत होने के साथ ही पुण्यलाभ की प्राप्ति के लिए श्रद्धालु ब्रम्ह मुहूर्त में महादेवघाट स्थित हटकेश्वर नाथ के दर्शन कर परिवार की सुख शांति की कामना करेंगे।

रायपुर. सावन माह (Sawan 2019) की शुरूआत होने के साथ ही पुण्यलाभ की प्राप्ति के लिए श्रद्धालु ब्रम्ह मुहूर्त में महादेवघाट स्थित (Mahadev ghat) हटकेश्वर नाथ (Lord shiva) के दर्शन कर परिवार की सुख शांति की कामना करेंगे। जिस तरह उज्जैन के महाकाल (Mahakaleshwar Jyotirlinga) के दर्शन का जो महात्मय है वहीं रायपुर के महादेवघाट में हटकेश्वर नाथ के दर्शन से मिलता है।

इस मंदिर में 500 साल पुराने अखंड धूना में ज्योति प्रज्जवलित हो रही है। धुना के ताप से रूद्राक्ष की माला को श्रद्धालु सिद्ध करके अपने कष्टों का निवारण करते हैं। माला के दानों को प्रसाद के रूप में ग्रहण कर धूना की भभूत अपने माथे पर धारण करते हैं साथ अपने कष्टों से मुक्ति के लिए इस भभूत को ले जाते हैं।

खारून तट पर स्थित भोलेबाबा के दरबार को महादेव घाट के नाम से जाना जाता है और भगवान शिव को हटकेश्वर महादेव कहा जाता है। गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग के पास ही राम जानकी लक्ष्मण और बरहा देव की प्रतिमा है। हटकेश्वर महादेव नागर ब्राम्हणों के संरक्षक देवता माने जाते हैं। शहर से 8 किमी दूर स्थित खारून नदी किनारे स्थित भगवान शिव का यह मंदिर प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक है। हटकेश्वर नाथ के सामने ही जूना अखाड़ा का परिसर नजर आता है ये वहीं परिसर है जहां दूर-दूर से आए साधु संत विश्राम के लिए रूकते हैं।

मंदिर का इतिहास
1402 ईस्वी में कलचुरी राजा रामचन्द्र के पुत्र ब्रम्हदेव राय के शासन काल में हाजीराज नाइक ने हटकेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराय था। ऋषिकेश में गंगानदी पर बने लक्ष्मण झूले की तर्ज कर यहां भी लक्ष्मण झूला है। महादेव घाट में कार्तिक माह की पूर्णिमा को लगने वाला पुन्नी मेला पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है।

 

Hatkeshwar mahadev ghat

काशी और गया के घाट की तरह है श्रद्धा
महादेव घाट में पितरों के मोक्ष के लिए भी श्राद्ध कर्म कराए जाते हैं। लोगों की श्रद्धा इस घाट के प्रति वैसे ही है, जैसी काशी और गया के घाट के लिए होती है।

हर कष्ट का निवारण
मंदिर के महंत के बेटे सुरेश गिरी ने बताया कि बहुत समय पहले मंदिर में एक सिद्ध बाबा थे, जो लडक़ी सुंघाकर हर तरह के कष्टों का निवारण करते थे। लोग उन्हें लकड़ सुघ्घा बाबा कहते थे। हटकेश्वर महादेव मंदिर में अब तक जितने भी महंत हुए हैं, सभी की समाधि बनी हुई है।

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