B.Ed., D.Ed. के दो वेतन वृद्धि रोकने का आदेश का शालेय शिक्षक प्रधान पाठक संघ ने किया विरोध

- यहा आदेश है कोर्ट की अवमानना : शालेय प्रधान पाठक संघ .

By: Bhupesh Tripathi

Published: 05 Sep 2020, 06:19 PM IST

रायपुर। बीएड,डीएड को शासन द्वारा जून 1993 को अनिवार्य योग्यता बना दिए जाने के कारण का उल्लेख करते हुए 27 साल बाद, 1993 के बाद देय दो अग्रिम वेतन वृद्धि की राशि वसूल करने के संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग के आदेश का शालेय शिक्षक प्रधान पाठक संघ ने कड़ी निंदा की है । संघ के प्रांत अध्यक्ष मनोज साहू सचिव सुरेश वर्मा संतोष शर्मा ने कहा कि यह आदेश कोर्ट की अवमानना है उन्होंने कहा है, कि यदि 1993 के बाद किसी को दो वेतन वृद्धि की पात्रता नहीं थी तो स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा ,1998, 2007,2011 ,2014 ,2016 ,2017, आदि में शिक्षकों को वेतन वृद्धि जारी करने का आदेश कैसे जारी हो गया ।

क्योंकि उपरोक्त अधिकांश आदेश माननीय हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी हुआ है। जिसमें शासन के द्वारा 16 जून 1993 को क्च.श्वस्र /ष्ठ.द्गस्र को अनिवार्य योग्यता बनाने का तर्क रखकर 1993 के बाद नियुक्त शिक्षकों को दो वेतन वृद्धि नहीं देने का तर्क रखा था। जिसे माननीय हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया अर्थात शासन की कोर्ट में हार हुई थी। माननीय हाईकोर्ट के दो वेतन वृद्धि प्रदान करने के निर्णय के परिपालन में शासन द्वारा उक्त सभी आदेश जारी किए गए थे ।संघ के संयोजक अमित तिवारी जिला अध्यक्ष ओमकार वर्मा ,संजय यदु ,महेश सरसीहा ने कहा है कि अधिकारियों द्वारा पूर्व के कोर्ट प्रकरणों का बिना अध्ययन के ही दिनांक 03/07 2020 को 1993 के बाद नियुक्त शिक्षकों को वेतन वृद्धि नहीं दिए जाने के आदेश जारी किया गया जो कि कोर्ट की अवमानना है तथा कोई भी पश्चवर्ती आदेश पुर्ववर्ती आदेश को प्रभावित नहीं करता है। संघ के समस्त पदाधिकारी इस निर्णय के हर स्तर की लड़ाई के लिए तैयार है।

Bhupesh Tripathi
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