जय जवान

भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने बुखार और रक्तस्राव से पीडि़त महिला को अस्पताल पहुंचा कर जान बचाई

By: Gulal Verma

Published: 20 Jul 2018, 11:12 PM IST

रक्षा और सुरक्षा बल के जवानों के मानवीय पक्ष का सामने आना न केवल स्वागतयोग्य है, बल्कि अनुकरणीय भी है। जब सुरक्षा बल के जवान गोली चलाने, मुठभेड़ करने से अलग जरूरतमंद लोगों की सेवा करते नजर आते हैं, तब हमारा समाज मजबूत होता है और देश में मानवता को बल मिलता है।
छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में विगत दिनों से अच्छी वर्षा हो रही है। अच्छी वर्षा जहां एक ओर वरदान की तरह है, वहीं दूसरी ओर जगह-जगह जल भराव, जगह-जगह झाडिय़ां उगने से, कच्ची सड़कें उधडऩे से आदिवासियों और वनवासियों के आगे कई तरह की मुसीबतें खड़ी हो जाती है। बस्तर के कोंडागांव के एक दूरदराज के गांव से भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवान जब गुजरे, तब उन्होंने 24 वर्षीय महिला सरस्वती यादव को बहुत तकलीफ में पाया। बारिश के मौसम और गांव में इलाज की सुविधा न होने के कारण सरस्वती यादव लगातार बुखार और रक्तस्राव से पीडि़त थी। उस महिला को अस्पताल पहुंचा कर बचाने का बीड़ा भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने उठाया।
धन्य है! वो जवान, जो महिला को उठाए हुए कई किलोमीटर नंगे पैर भी चले। हडेली गांव से बेहद मुश्किल भरे रास्तों से गुजरते हुए कोंडागांव अस्पताल में लाई गई महिला की जान जब बच गई तब कमांडेंट ने कहा -'हमारे जवानों को ऐसा प्रशिक्षण मिला है कि वे हर स्थिति में खुद को ढाल कर अपने लक्ष्य को हासिल करते हैं। फिर चाहे वो ऑपरेशन हो या सेवाकार्य। महिला की जान बचाना हमारे लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं है।Ó जब सुरक्षा बलों के जवानों का ऐसा उद्गार और ऐसी सच्ची सेवा भावना समाज के सामने आती है तब देशवासियों का दिल बोल उठता है, 'जय जवानÓ।
समाज में आज एक बड़ा तबका ऐसा है जो रक्षा और सुरक्षा बलों के जवानों को संदेह की निगाह से देखता है। कई बार ऐसी घटनाएं होती हैं जब वर्दी न केवल स्वयं शर्मसार होती है, बल्कि समाज और देश को भी शर्मसार कर देती है। तमाम ऐसे जवान जो मुश्किल इलाकों मे काम कर रहे हैं, उन्हें प्राथमिक रूप से मानवीय और संवेदनशील होना ही चाहिए। जब-जब जवानों में सेवा का सच्चा जब्बा जगा दिखेगा, तब-तब देशवासियों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा।
बस्तर में अगर जवान अपनी सेवा वाली छवि का विस्तार कर लें तो हिंसक व अराजकतत्वों को कहीं ठिकाना नहीं मिलेगा। बुनियादी ढांचे संबंधी व्यवस्था नागरिक प्रशासन की जिम्मेदारी है, पर मानव के रूप में रोगियों की सेवा करने से कौन-सी बात रोकती है? जरूरी है कि ऐसे इलाकों में तैनात जवान आम लोगों के सखा बनकर काम करें। अगर ऐसा हुआ तो बस्तर में फिर शांति का शानदार दौर लौट आएगा। बस्तर को स्वर्ग बनाने का रास्ता सेवा के ऐसे ही अनेक पड़ावों से होकर गुजरेगा।

Gulal Verma Desk
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